ओडिशा वर्ष 2023 में विश्व हॉकी का एक बार फिर से आयोजन करने जा रहा है। जबकि उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों की भी तैयारी नहीं हो पायी। यही वजह है कि इस साल राष्ट्रीय खेल की मेजबानी का अवसर मिलने के बाद भी राष्ट्रीय खेल नहीं हो पाए। हालांकि विभागीय अधिकारियों की ओर से इसके लिए कोविड को ढाल बनाया जा रहा है।
ओडिशा में वर्ष 2018 में पुरुष हॉकी विश्वकप का सफलतापूर्वक आयोजन किया। जबकि अब फिर से वह 2023 में भुवनेश्वर और राउरकेला में विश्व हॉकी का आयोजन करने जा रहे हैं। इसके लिए राउरकेला में विश्वस्तरीय हॉकी स्टेडियम बनाने का काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के विभिन्न ब्लॉकों में 17 नए एस्ट्रो टर्फ बनाए जा रहे हैं।
जबकि इसके ठीक उलट उत्तराखंड को वर्ष 2018 में राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का मौका मिला, लेकिन खेल सरकार के एजेंडे में शामिल न होने की वजह से इस साल राष्ट्रीय खेल नहीं हो पाए। इसके बाद उत्तराखंड को वर्ष 2021 राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का मौका मिला। इसके लिए दावा किया गया कि विदेश से कोच मंगवाए जाएंगे।
युवाओं में खेल भावना को विकसित करने के लिए सभी जिलों में खेल प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। केरल प्रारुप के अनुरूप देहरादून और हल्द्वानी में प्री फ्रेब्रीकेट खेल गांव का निर्माण किया जाएगा। राष्ट्रीय खेलों के लिए विभिन्न आयोजन स्थलों तक रोड नेटवर्क का विकास किया जाएजगा। लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं किया जा सका। यही वजह रही कि वर्ष 2018 के बाद अब 2021 में भी राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का मौका मिलने के बावजूद प्रदेश में राष्ट्रीय खेल नहीं हो पाए।
आमतौर पर ओलंपिक जैसे बड़े खेलों में टीमों को कॉर्पोरेट स्पॉन्सर करते हैं, लेकिन भारतीय हॉकी टीम की कहानी कुछ दूसरी है, पुरुष और महिला हॉकी टीम को कोई कॉर्पोरेट नहीं बल्कि ओडिशा की सरकार स्पांसर कर रही है। जबकि इसके ठीक उलट उत्तराखंड में खेलों के लिए पर्याप्त बजट तक नहीं हैं।
खेलों का वर्ष 2021-22 का कुल बजट मात्र 170 करोड़ है। जबकि स्कूलों को खेलों के नाम पर समग्र शिक्षा से मात्र 25 हजार की धनराशि दी जा रही है। भारतीय हॉकी टीम को जब वित्तीय सहायता की जरुरत थी, तब कोई और नहीं बल्कि नवीन पटनायक सरकार साथ खड़ी हुई, उनकी सरकार ने दोनो टीमों को स्पांसर किया।
पलायन को मजबूर हैं खिलाड़ी
प्रदेश में पर्याप्त खेल सुविधाएं न मिलने से खिलाड़ी दूसरे राज्यों से खेलने का मजबूर हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया मूल रूप से हरिद्वार जिले के रोशनाबाद की है, लेकिन यहां पर्याप्त सुविधाएं न मिलने से वह उत्तर प्रदेश से खेल रही हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड में ओलंपिक पदक विजेता के स्वर्ण पदक जीतने पर पुरस्कार की धनराशि मात्र डेढ़ करोड़ है। जबकि अन्य प्रदेश इससे कई अधिक धनराशि पुरस्कार के रूप में दे रहे हैं।
खेल विभाग: इतने पद हैं खाली
खेल विभाग में खेल प्रशिक्षकों के 60 में से 42 पद खाली हैं। जबकि उप खेल अधिकारियों के 27 में से 13 पद खाली चल रहे हैं। खेल प्रशिक्षकों के कुल 87 पदों में से 55 पद पिछले काफी समय से खाली चल रहे हैं। यही हाल स्कूलों में व्यायाम शिक्षकों का है। विभाग में कई स्कूलों में व्यायाम शिक्षक नहीं हैं।
यह है एस्ट्रो टर्फ
एस्ट्रो टर्फ एक अमेरिकी सहायक कंपनी है। जो खेलों में खेलने के लिए कृत्रिम टर्फ का उत्पादन करती है। इसमें मैदान पूूरी तरह से समतल होता है। इसमें कृत्रिम घास उगाई जाती है जो साधारण घास की अपेक्षा अधिक मजबूत होती है। खेलने के दौरान यह घास उखड़ती नहीं। इसकी वजह से खेलने के दौरान मैदान में गड्ढे होने की समस्या भी नहीं होती।