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Tokyo Olympics: उत्तराखंड सरकार के एजेंडे में नहीं है राष्ट्रीय खेल हॉकी, ढांचागत सुविधाएं तक नदारद

Fri, 06 Aug 2021 02:52 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून

सार

उत्तराखंड में खेलों के क्षेत्र में युवा सुनहरा कॅरियर बना सकते हैं। खासकर हॉकी के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन खिलाड़ियों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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राष्ट्रीय खेल हॉकी उत्तराखंड सरकार की प्राथमिकताओं में नहीं रहा। यही वजह है कि प्रदेश के खिलाड़ियों को ढांचागत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही है। पूरे राज्य में केवल देहरादून में एकमात्र एस्ट्रो टर्फ है। हालांकि हरिद्वार में एक अन्य एस्ट्रो टर्फ का निर्माण किया जा रहा है।

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खेल प्रशिक्षकों के 60 फीसदी से अधिक पद खाली हैं। जबकि खेल की नर्सरी कहे जाने वाले स्कूलों में भी खेल के मैदान तक नहीं हैं। प्रदेश की हॉकी एसोसिएशन का कहना है कि हॉकी को बढ़ावा देने के लिए कम से कम हर जिले में एक एस्ट्रो टर्फ होनी चाहिए। 

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उत्तराखंड में खेलों के क्षेत्र में युवा सुनहरा करियर बना सकते हैं। खासकर हॉकी के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं, लेकिन खिलाड़ियों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में पर्याप्त एस्ट्रो टर्फ तक नहीं हैं।

यदि हर जिले में एक एस्ट्रो टर्फ नहीं बन सकता तो कम से कम पांच से छह एस्टो टर्फ होने चाहिए थे। इसके अलावा खेल प्रशिक्षकों की भी कमी बनी है। खेल विभाग में खेल प्रशिक्षकों के 63 फीसदी पद वर्षों से खाली हैं। कुछ यही हाल शिक्षा विभाग का है। सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों के खेलने के लिए खेल मैदान तक नहीं हैं।

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खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में खेल मैदान न होने से खिलाड़ी हॉकी की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। पूर्व राज्य खेल समन्वयक चंद्र किशोर नौटियाल के मुताबिक समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों को खेलों के लिए वर्ष भर में 25 हजार रुपये दिए जाते हैं।

इसी बजट से सभी खेलों की तैयारी करनी होती है। पर्वतीय क्षेत्र के स्कूलों में खेल मैदान न होने से छात्र प्रैक्टिस भी नहीं कर पाते। उत्तराखंड हॉकी एसोसिएशन के सचिव किशोर सिंह बफिला बताते हैं कि कुमाऊं मंडल में एक भी एस्ट्रो टर्फ नहीं है। जबकि हर जिले में कम से कम एक-एक एस्ट्रो टर्फ होना चाहिए।   
 

ओडिशा विश्व हॉकी का करने जा रहा आयोजन और उत्तराखंड राष्ट्रीय खेल की नहीं कर पाया तैयारी 

ओडिशा वर्ष 2023 में विश्व हॉकी का एक बार फिर से आयोजन करने जा रहा है। जबकि उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों की भी तैयारी नहीं हो पायी। यही वजह है कि इस साल राष्ट्रीय खेल की मेजबानी का अवसर मिलने के बाद भी राष्ट्रीय खेल नहीं हो पाए। हालांकि विभागीय अधिकारियों की ओर से इसके लिए कोविड को ढाल बनाया जा रहा है। 

ओडिशा में वर्ष 2018 में पुरुष हॉकी विश्वकप का सफलतापूर्वक आयोजन किया। जबकि अब फिर से वह 2023 में भुवनेश्वर और राउरकेला में विश्व हॉकी का आयोजन करने जा रहे हैं। इसके लिए राउरकेला में विश्वस्तरीय हॉकी स्टेडियम बनाने का काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के विभिन्न ब्लॉकों में 17 नए एस्ट्रो टर्फ बनाए जा रहे हैं।

जबकि इसके ठीक उलट उत्तराखंड को वर्ष 2018 में राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का मौका मिला, लेकिन खेल सरकार के एजेंडे में शामिल न होने की वजह से इस साल राष्ट्रीय खेल नहीं हो पाए। इसके बाद उत्तराखंड को वर्ष 2021 राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का मौका मिला। इसके लिए दावा किया गया कि विदेश से कोच मंगवाए जाएंगे।

युवाओं में खेल भावना को विकसित करने के लिए सभी जिलों में खेल प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। केरल प्रारुप के अनुरूप देहरादून और हल्द्वानी में प्री फ्रेब्रीकेट खेल गांव का निर्माण किया जाएगा। राष्ट्रीय खेलों के लिए विभिन्न आयोजन स्थलों तक रोड नेटवर्क का विकास किया जाएजगा। लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं किया जा सका। यही वजह रही कि वर्ष 2018 के बाद अब 2021 में भी राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी का मौका मिलने के बावजूद प्रदेश में राष्ट्रीय खेल नहीं हो पाए।  
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ओडिशा सरकार भारतीय हॉकी टीम को स्पांसर कर रही, यहां खिलाड़ियों के लिए सुविधा नहीं 

आमतौर पर ओलंपिक जैसे बड़े खेलों में टीमों को कॉर्पोरेट स्पॉन्सर करते हैं, लेकिन भारतीय हॉकी टीम की कहानी कुछ दूसरी है, पुरुष और महिला हॉकी टीम को कोई कॉर्पोरेट नहीं बल्कि ओडिशा की सरकार स्पांसर कर रही है। जबकि इसके ठीक उलट उत्तराखंड में खेलों के लिए पर्याप्त बजट तक नहीं हैं।

खेलों का वर्ष 2021-22 का कुल बजट मात्र 170 करोड़ है। जबकि स्कूलों को खेलों के नाम पर समग्र शिक्षा से मात्र 25 हजार की धनराशि दी जा रही है। भारतीय हॉकी टीम को जब वित्तीय सहायता की जरुरत थी, तब कोई और नहीं बल्कि नवीन पटनायक सरकार साथ खड़ी हुई, उनकी सरकार ने दोनो टीमों को स्पांसर किया। 

पलायन को मजबूर हैं खिलाड़ी 
प्रदेश में पर्याप्त खेल सुविधाएं न मिलने से खिलाड़ी दूसरे राज्यों से खेलने का मजबूर हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया मूल रूप से हरिद्वार जिले के रोशनाबाद की है, लेकिन यहां पर्याप्त सुविधाएं न मिलने से वह उत्तर प्रदेश से खेल रही हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड में ओलंपिक पदक विजेता के स्वर्ण पदक जीतने पर पुरस्कार की धनराशि मात्र डेढ़ करोड़ है। जबकि अन्य प्रदेश इससे कई अधिक धनराशि पुरस्कार के रूप में दे रहे हैं। 

खेल विभाग: इतने पद हैं खाली 
खेल विभाग में खेल प्रशिक्षकों के 60 में से 42 पद खाली हैं। जबकि उप खेल अधिकारियों के 27 में से 13 पद खाली चल रहे हैं। खेल प्रशिक्षकों के कुल 87 पदों में से 55 पद पिछले काफी समय से खाली चल रहे हैं। यही हाल स्कूलों में व्यायाम शिक्षकों का है। विभाग में कई स्कूलों में व्यायाम शिक्षक नहीं हैं।  

यह है एस्ट्रो टर्फ 
एस्ट्रो टर्फ एक अमेरिकी सहायक कंपनी है। जो खेलों में खेलने के लिए कृत्रिम टर्फ का उत्पादन करती है। इसमें मैदान पूूरी तरह से समतल होता है। इसमें कृत्रिम घास उगाई जाती है जो साधारण घास की अपेक्षा अधिक मजबूत होती है। खेलने के दौरान यह घास उखड़ती नहीं। इसकी वजह से खेलने के दौरान मैदान में गड्ढे होने की समस्या भी नहीं होती।
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