16वीं लोकसभा चुनाव के गठन में एक ओर अनोखी बात होगी। पहली बार विदेशी नागरिक भारत के प्रधानमंत्री के लिए होने वाले आम चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
निर्वाचन आयोग ने सशर्त गाइडलाइन जारी की
देश में बसे निर्वासित तिब्बतियों को वोटर बनाने के लिए इस बार निर्वाचन आयोग ने सशर्त गाइडलाइन जारी कर दी है। इस फैसले से उत्तराखंड, हिमाचल व बिहार के गया में बड़ी संख्या में रहने वाले तिब्बतियों को भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में योगदान देने का रास्ता साफ हो गया है।
तिब्बती शरणार्थियों को भारतीय नागरिक माने जाने के संबंध में केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के तेंजिंग चौपेग लिंग रिन पोचे बनाम केंद्र सरकार मामले में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए निर्देश जारी किए है।
27 सितम्बर 2011 को आए इस फैसले के बाद यह माना गया था कि ऐसा तिब्बती जो कि 26 जनवरी 1950 और 01 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्मा हैं उसे भारतीय नागरिक माना जाएगा।
बशर्ते नागरिकता को लेकर वह केंद्रीय गृह मंत्रालय की सभी शर्ते पूरी करता हो। विगत सात फरवरी को यह पत्र केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने सभी प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजा।
जिलाधिकारियों को पत्र भेजा
राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने 21 फरवरी को सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर आदेशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा।
चूंकि देहरादून में निर्वासित तिब्बतियों की संख्या 16 हजार के पार है, इसलिए देहरादून के जिला मजिस्ट्रेट बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने 14 मार्च को इस आशय के आदेश जारी कर दिए।
तिब्बती शरणार्थियों के प्रमुख निवास स्थलों पर अगले पांच दिन विशेष अभियान चलाकर उन्हें मतदाता बनाया जाएगा। सहस्त्रधारा, कलेमेंटाउन, राजपुर, मांडूवाला में शिविर लगाकर मतदाता बनाने का अभियान चलेगा।
उत्तराखंड में हरिद्वार व टिहरी संसदीय सीट पर तिब्बतियों की खासी संख्या है।