सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी बुधवार सुबह ठीक 9.57 बजे आरटीओ कार्यालय के मुख्य गेट पर पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने अपने साथ मौजूद सुरक्षा अधिकारियों को मुख्य गेट पर तैनात कर दिया। निर्देश दिए कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को तब तक अंदर न आने दिया जाए, जब तक वह निरीक्षण नहीं कर लेते। सुरक्षा अधिकारियों ने गेट पर मोर्चा संभाल लिया और दस बजे के बाद पहुंचने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को गेट पर ही रोक लिया। हालांकि, एआरटीओ (प्रशासन) द्वारिका प्रसाद और कुछ चुनिंदा अधिकारी व कर्मचारी समय से पहले कार्यालय पहुंच गए थे।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ एक-एक करके ड्राइविंग लाइसेंस कक्ष, टैक्स, लाइसेंस, परमिट समेत सभी कक्षों का निरीक्षण किया। इस दौरान पूरे दफ्तर में हड़कंप की स्थिति रही। उन्होंने एआरटीओ द्वारिका प्रसाद से आरटीओ के बारे में जानकारी लेने के साथ ही उनके कक्ष का निरीक्षण भी किया, लेकिन आरटीओ डीसी पठोई कक्ष में नहीं मिले। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों के अनुपस्थित पाए जाने पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई। मौके पर उपस्थित परिवहन सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी और परिवहन आयुक्त रणवीर सिंह चौहान से कहा कि आरटीओ कार्यालय एक ऐसा दफ्तर है, जो आम जन से जुड़ा है।
प्रतिदिन इस कार्यालय में हजारों की संख्या में लोग लाइसेंस बनवाने, टैक्स जमा कराने, गाड़ियों का परमिट बनवाने के लिए आते हैं। ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों की लेटलतीफी बरदाश्त नहीं की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने परिवहन सचिव से बात कर आरटीओ डीसी पठोई को निलंबित करने और अनुपस्थित कर्मचारियों के वेतन काटने के आदेश दिए। मुख्यमंत्री जब तक आरटीओ कार्यालय में रहे, अधिकारियों और कर्मचारियों की सांसें अटकी रहीं।
लाइन में लगे लोगों से भी ली जानकारी
औचक निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने आरटीओ कार्यालय में टैक्स जमा कराने समेत तमाम विभागीय कामकाज के लिए लाइन में लगे लोगों से भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने पूछा कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से उन्हें सहयोग मिलता है या नहीं।
भाग निकला दलालों का दल
आरटीओ कार्यालय में मंडराने वाले दलालों को जैसे ही इस बात की भनक लगी कि मुख्यमंत्री आने वाले हैं तो वे चलते बने। ऐसे में वे वाहन स्वामी परेशान हो गए, जिन्होंने अपने तमाम दस्तावेज दलालों को काम कराने के लिए दिए थे। मुख्यमंत्री धामी जब तक आरटीओ कार्यालय में रहे, दलाल आसपास भी नहीं फटके।
सीएम के जाने के बाद मुस्तैद नजर आए
मुख्यमंत्री के जाने बाद कार्यालय में तैनात अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी पर मुस्तैद नजर आए। आलम यह रहा कि आमजन से सीधे मुंह बात नहीं करने वाले अधिकारी और कर्मचारी लोगों से पूछ-पूछकर उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान कर रहे थे। अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली में अचानक आए बदलाव को देखकर लोग खुश दिखे।
सता रहा कार्रवाई का डर, दिनभर चर्चा का दौर
सीएम के निरीक्षण के बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्रवाई का डर सता रहा है। कार्यालय में तैनात तमाम अधिकारी और कर्मचारी दिनभर इस बारे में चर्चा करते नजर आए। इस बात की चर्चा रही कि शासन या मुख्यालय स्तर से अभी और अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
2012 में भी हटाए गए थे आरटीओ
विभागीय सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2012 में तत्कालीन परिवहन मंत्री स्व. सुरेंद्र राकेश ने अधिकारियों के साथ कार्यालय में औचक निरीक्षण किया था। कई खामियां पाए जाने के बाद तत्कालीन आरटीओ को हटाकर नए आरटीओ की तैनाती कर दी थी।
विवादों के घेरे में रहा है आरटीओ कार्यालय
इससे पहले भी आरटीओ कार्यालय में कई अधिकारियों, कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। दो साल पूर्व आरटीओ कार्यालय फर्जी तरीके से गाड़ियों का बीमा कराने को लेकर चर्चा में आया था। उस समय विजिलेंस टीम ने आरटीओ के एक कर्मचारी और दो दलालों समेत तीन को हिरासत में लिया था।