फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आपके घर में रखी है ऐसी डिवाइस जो जाने-अंजाने करवा रही तलाक

Wed, 28 Jun 2017 08:39 AM IST
निशांत खनी/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
तलाक
विज्ञापन
पति-पत्नी के बीच एक ऐसी चीज आ रही है जो उनके पारिवारिक जीवन को तबाह कर रही है। कारण बेहद छोटा है लेकिन इसे छोटा समझने की भूल शादीशुदा ‌जीवन को बर्बाद कर रहा है।
विज्ञापन


शादी से पहले एक-दूसरे को करीब लाने वाला मोबाइल शादी के बाद पति-पत्नी के बीच दूरियों की वजह बन रहा है। अब हर कोई मोबाइल फोन से चिपका रहता है। एक ही छत के नीचे रहने के बाद भी पति-पत्नी को एक-दूसरे से बात करने की फुर्सत नहीं होती।

इससे रिश्तों की मिठास कम हो रही है। नौबत तलाक तक पहुंचने लगी है। उत्तराखंड पुलिस के आंकड़े इसके गवाह हैं। पुलिस के पास पहुंचने वाले अधिकतर दंपति के बीच के झगड़े की वजह एक-दूसरे को टाइम नहीं देना है। करीब 70 प्रतिशत झगड़े मध्यम और उच्च मध्यम वर्गीय परिवारों से जुड़े हैं।
विज्ञापन

बेहद नाजुक हो गया है सात जन्मों का रिश्ता 

मोबाइल फोन
बदलती जीवनशैली में पति-पत्नी का सात जन्मों का रिश्ता बेहद नाजुक हो गया है। मामूली बात पर होने वाले झगड़े थानों की दहलीज तक पहुंच रहे हैं। झगड़े निपटाने के लिए हर जिले में महिला हेल्पलाइन और ऐच्छिक ब्यूरो खोले गए हैं। 

मकसद दंपतियों की काउंसिलिंग कर परिवारों को टूटने से बचाना है। पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष भर में 6812 पारिवारिक झगड़े महिला हेल्पलाइन और ऐच्छिक ब्यूरो में पंजीकृत हुए हैं।

इनमें पति एवं पत्नी की काउंसलिंग के बाद 5615 परिवार बिखरने से बचाए गए हैं। 464 मामलों में मुकदमे और 488 मामलों में काउंसिलिंग चल रही है। ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार के सबसे अधिक मामले हैं।

देखिए कैसे टूट रहे रिश्ते

मोबाइल यूजर्स
हरिद्वार के पवन और नेहा की शादी को साल भर भी नहीं हुआ है। दोनों की लव मैरिज है। नेहा पढ़ी-लिखी है। अपने खर्चे पूरे करने के लिए नेहा भी सिडकुल में नौकरी करती है। नौकरी के साथ दंपति का सुख-चैन भी छीन गया है। नेहा मोबाइल पर ही ज्यादा वक्त गुजारती है, जो पवन को अखरता है। अब मामला पुलिस तक पहुंचा है। 

देहरादून के गोविंद और रजनी की शादी के अभी पांच ही हुए हैं। इनका तीन साल का बेटा है। दोनों एक छत के नीचे रहते जरूर हैं। पर किसी को बेटे को देखने तक की फुर्सत नहीं होती। दोनों अपने-अपने फोन पर चिपके रहते हैं। झगड़ा इसी बात पर है।

रुद्रपुर की हर्षिता और अमनदीप का रिश्ता तलाक तक पहुंच गया है। हर्षिता ग्रेजुएट और अमनदीप हाईस्कूल फेल है, लेकिन अमीर है। हर्षिता ने अनमदीप के ऐशोआराम देख शादी तो कर ली, लेकिन अब खुद को एडजर्स्ट नहीं कर पा रही है। हर्षिता का शादी से पहले ब्वॉय फ्रेंड है। वह उससे चैटिंग करती है। 
(नोट - केस स्टडी में सभी नाम काल्पनिक हैं)

कुछ वर्षों पहले तक दांपत्य जीवन के झगड़े सिर्फ गरीब परिवार से जुड़े होते थे। शराब के नशे में पत्नी से मारपीट और घर चलाने के लिए खर्च नहीं देने जैसे मामले आते थे। लेकिन अब झगड़े की वजह और परिवार भी बदल गए हैं। मध्यम और उच्च मध्यम वर्गीय परिवारों के सर्वाधिक झगड़े ब्यूरो में आ रहे हैं।
- शाहजहां जावेद खान, प्रभारी हेल्पलाइन उत्तराखंड 
 
विज्ञापन

काउंसिलिंग का पैनल 

तलाक
मनोचिकित्सक, डॉक्टर, वकील, मैरिज काउंसलर, जिला प्रोविजन अधिकारी और महिला आयोग सदस्य के अलावा हेल्पलाइन और ऐच्छिक ब्यूरो प्रभारी अलग-अलग स्तर पर पति एवं पत्नी की काउंसलिंग करते हैं। 

जिला        कुल मामले        समझौता
देहरादून         1345             953
हरिद्वार           2374             2132
नई टिहरी       73                 49
पौड़ी             244                191
चमोली          45                  34
रुद्रप्रयाग        61                  55
उत्तरकाशी       26                  25
नैनीताल        717                707
ऊधमसिंह नगर        1637      1278
अल्मोड़ा           89                72
पिथौरागढ़        38                 27
चंपावत           32                 21
बागेश्वर           71                 71
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें