भारत के सर्वेयर जनरल रहे सर जार्ज एवरेस्ट ने अपनी प्रयोगशाला मसूरी में स्थापित कर देश-दुनिया की कई ऊंची चोटियों की खोज कर उनको मानचित्र में स्थान दिया। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया, लेकिन सोमवार (चार जुलाई) को उनका जन्मदिन मनाना पर्यटन विभाग भूल गया। विभाग ने कोई कार्यक्रम शहर में आयोजित नहीं किया।
1832 से लेकर 1843 तक सर जार्ज एवरेस्ट ने दुनिया की कई ऊंची चोटियों की खोज मसूरी में रहकर की थी। उनके नाम पर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का नामकरण किया गया था, जबकि पहले इसको नेपाल में सागरमाथा, तिब्बत में चोमोलुग्मा कहते थे। वहीं, सर जार्ज 1830 से लेकर 1843 तक भारत के सर्वेयर जनरल भी रहे थे। उनका जन्म चार जुलाई 1790 में हुआ था। मसूरी के सर जार्ज एवरेस्ट हाउस का पार्क एस्टेट में पर्यटन विभाग द्वारा सौंदर्यीकरण किया, लेकिन उनके 232वें जन्मदिवस पर पर्यटन विभाग ने कुछ पौधे रोपकर इतिश्री कर ली।
वहीं, इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने अपने घर से सर जार्ज की तस्वीर एवरेस्ट हाउस लाए, जहां कुछ लोगों संग चित्र पर पुष्प चढ़ाकर याद किया। सर जार्ज के जन्मदिन पर पूर्व में पर्यटन विभाग द्वारा जार्ज एवरेस्ट हाउस में कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार पर्यटन विभाग ने कुछ पौधे रोपकर काम चला लिया। इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि सर जार्ज ने जीवन का लंबा अरसा मसूरी में बिताया था। बताया कि सर जार्ज के जन्मदिन पर घर से तस्वीर जार्ज एवरेस्ट हाउस लेकर गए और पर्यटन विभाग की चतुर्थ श्रेणी कर्मी सुमन समेत कुछ लोगों के साथ चित्र पर पुष्प चढ़ाकर याद किया।
सर जार्ज एवरेस्ट के जन्मदिवस पर विभाग ने अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ एवरेस्ट हाउस के आसपास 10 पौधे लगा। अन्य कोई कार्यक्रम सर जार्ज एवरेस्ट के जन्मदिवस नहीं किया गया।
- जसपाल सिंह चौहान, जिला पर्यटन अधिकारी