परिवहन विभाग के प्रावधानों और सीबीएसई बोर्ड की ओर से तय गाइडलाइन के विपरीत चलने वाली स्कूली बसों और वैन संचालकों पर परिवहन विभाग के अफसरों ने शिकंजा कस दिया है। आरटीओ प्रवर्तन की अगुवाई में जांच अभियान में देहरादून, हरिद्वार, विकासनगर, रुड़की, ऋषिकेश में 535 स्कूली बसों, वैन की जांच करते हुए 201 बसों का चालान करते हुए 25 वाहनों को सीज कर दिया गया।
आरटीओ प्रवर्तन सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि फिलहाल लगातार दो दिन चलाए गए अभियान के दौरान देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और रुड़की जैसे शहरों में 535 स्कूली बसों, वैन की जांच की गई, जिसमें से 25 स्कूली बसों और बैंक को मौके पर ही सीज कर दिया गया, जबकि 201 गाड़ियों का चालान किया गया। वहीं, बाकी गाड़ियों में कागजात दुरुस्त पाए जाने के साथ ही निर्धारित परिवहन प्रावधानों के तहत संचालित होती पाई गई। शर्मा ने बताया कि विशेष जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को सिर्फ उन्हीं स्कूली बसों, वैन में भेजें जो निर्धारित प्रावधानों के तहत संचालित की जा रही हैं।
बसों, वैन में फर्स्ट एड बाक्स तक नहीं
अभियान के दौरान यह बात सामने आई कि कई स्कूली बसों, वैन मेें अग्निशमन सुरक्षा के उपकरणों संग ही फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं थे। कई गाड़ियों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा था। आरटीओ का कहना है कि गाड़ियों को सीज व चालान करने के बाद बच्चों और अभिभावकों को थोड़ी दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ा, लेकिन बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ भी तो नहीं किया जा सकता है।
सीबीएसई बोर्ड के ये हैं मानक
बसों का रंग पीला होना चाहिए, गाड़ियों पर स्कूल का नाम अंकित होने के साथ ही संबंधित स्कूल का नंबर अंकित होना चाहिए, गाड़ियों में अग्निशमन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए, दुर्घटना होने की स्थिति में बच्चों को तत्काल इलाज मुहैया कराने को लेकर फर्स्ट एड बॉक्स की व्यवस्था होनी चाहिए, बच्चे आसानी से चढ़ और उतर सकें, इसके लिए गाड़ियां लोफ्लोर होनी चाहिए, खिड़कियों पर सुरक्षा जाली होनी चाहिए, ताकि बच्चे खिड़की से बाहर सिर न निकाल सकें, बसों में बच्चों के बैग रखने के लिए जगह होनी चाहिए, स्कूली बस, वैन चालक ड्रेस में होने चाहिए, साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस संग गाड़ी के तमाम दस्तावेज होने चाहिए, बसों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के साथ ही जीपीएस लगाना अनिवार्य होगा, बसों की अधिकतम रफ्तार 40 किमी प्रति घंटा होगी, स्कूली बसों के दरवाजों पर ताला लगाना अनिवार्य होगा, स्कूल बस, वैन किसी भी हालत में दूसरी गाड़ी को ओवरटेक नहीं करेंगे।