पिछले साल जून में एसटीएफ ने सेलाकुई में एक फैक्टरी पकड़ी जिसमें ब्रांडेड दवाओं के लेबल, क्यूआर कोड व अन्य सामग्री बरामद हुई। इस कार्रवाई में 12 लोग गिरफ्तार हुए। आगरा में एक दवा फैक्टरी पकड़ी जिसका जुड़ाव भी उत्तराखंड से मिला।
बीते चार सालों में खुद एसटीएफ और पुलिस ने दर्जनों कार्रवाईयां कीं। बावजूद इसके उत्तराखंड में नकली दवाओं का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है। माफिया सक्रिय हैं और लगातार लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। एसटीएफ के ताजा खुलासे ने भी यह साबित कर दिया है कि नकली दवाओं का जाल केवल उत्तराखंड के रास्ते अन्य राज्यों तक फैला हुआ है। एसटीएफ ने पहले भी सेलाकुई और हरिद्वार की कुछ फैक्टरियों में छापे मारे थे जिनमें नकली दवाओं का जखीरा बरामद हुआ था। आगरा में पकड़े गए नकली दवा रैकेट की जांच में भी उत्तराखंड कनेक्शन सामने आया है।
प्रशासन ने बताया था कि संदिग्ध दवाएं उत्तराखंड से सप्लाई की जा रही थीं और इन्हें उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बेचा जा रहा था। नकली दवाओं का कारोबार इसलिए भी फल-फूल रहा है क्योंकि इसमें भारी मुनाफा है और निगरानी तंत्र अभी भी कमजोर है। पिछले साल शासन ने एसटीएफ को निगरानी के लिए नोडल एजेंसी बनाया था लेकिन ड्रग इंस्पेक्टर या अन्य अधिकारी के रूप में एक भी विशेषज्ञ अब तक एसटीएफ में नियुक्त नहीं किया गया।
कई बार ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे मेडिकल स्टोरों तक बिना जांच के दवाएं पहुंच जाती हैं। इससे मरीजों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। दवा माफिया नए तरीके अपनाकर धंधे को जारी रखे हुए हैं। अब एसटीएफ ने भी अपील की है कि यदि कोई इस तरह के धंधे के बारे में जानता है तो वह अपना नाम गोपनीय रखते हुए सूचना दे सकता है। इसके लिए एसटीएफ ने 0135-2656202 और 9412029536 नंबर भी जारी किए हैं।
Iये हैं कुछ बड़ी कार्रवाईयां
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- अप्रैल 2026 (उधम सिंह नगर) : दिनेशपुर इलाके में एक अवैध फैक्टरी पकड़ी गई जो डायबिटीज (शुगर) की आयुर्वेदिक दवाओं में एलोपैथिक दवाइयां मिलाकर बेच रहे थे।
- फरवरी 2026 (हरिद्वार-देहरादून): एसटीएफ ने एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए तीन और लोगों को गिरफ्तार किया। इनसे भारी मात्रा में रैपर और कच्चा माल बरामद हुआ।
- सितंबर 2025 (देहरादून): एसटीएफ ने बड़े रैकेट का पर्दाफाश कर दिल्ली के मुख्य मास्टरमाइंड देवी दयाल गुप्ता समेत 12 लोगों को जेल भेजा। इनकी सेलाकुई की फैक्टरी में 1.40 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकली दवाइयां बनाई जा चुकी थीं।
- मई-जून 2025 (हरिद्वार-देहरादून): एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साईं फार्मा का भंडाफोड़ किया। बिना ड्रग लाइसेंस के 13 करोड़ की दवा बेची गई थी।
- मार्च 2024 (कोटद्वार): ड्रग विभाग और एसटीएफ ने एक संयुक्त कार्रवाई में नेक्टर हर्ब्स एंड ड्रग्स फैक्ट्री पकड़ी जो चॉक पाउडर से नकली एंटीबायोटिक बना रही थी।
- जुलाई 2022 (हरिद्वार): एसटीएफ ने नकली दवाओं का निर्माण करने वाली फैक्टरी पर छापा मारा। भारी मात्रा में एक्सपायर दवाइयां और 26,000 कैप्सूल की खेप पकड़ी गई।