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पारिस्थितिकी के संरक्षण में हिम तेंदुओं का योगदान अहम

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देहरादून। यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) एवं उत्तराखंड वन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में गंगोत्री, गोविंद एवं दारमा-व्यास घाटी के स्थानीय लोगों के लिए पैरा टेक्सोनॉमी विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ वन अनुसंधान संस्थान में किया गया। सेमिनार का उद्घाटन वन अनुसंधान संस्थान के वन संवर्धन एवं प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख आरपी सिंह ने किया।
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मुख्य अतिथि आरपी सिंह ने हिमालयी क्षेत्र की पारिस्थितिकी में उनकी जिम्मेदारियों एवं संरक्षण में योगदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही उच्च हिमालर्यी क्षेत्रों में पारिस्थितिकी में इंसानों के साथ-साथ हिम तेंदुओं के योगदान और उनके संरक्षण पर जोर दिया। अपर प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं सिक्योर हिमालय परियोजना के नोडल अधिकारी रंजन कुमार मिश्रा ने कहा कि पैरा टैक्सोनॉमिस्ट का जैव विविधता संरक्षण में वही योगदान है जैसा कि देश की सुरक्षा में पैरा मिलिट्री फोर्स का योगदान है। वनस्पति विज्ञान प्रभाग के प्रमुख डॉ. अनूप चंद्रा ने हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले औषधीय पौधों व उन पर मंडरा रहे संकट के बारे में विस्तार से बताया। यूएनडीपी सिक्योर हिमालय परियोजना की राज्य परियोजना अधिकारी अपर्णा पांडे ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यशाला में पौधों के संग्रह की विधि एवं हरबेरियम के महत्व के साथ ही कीटों, तितलियों एवं विभिन्न प्रजातियों के पौधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में डॉ. प्रवीण कुमार समय संस्थान के कई विज्ञानी उपस्थित रहे।
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