कार्मिक विभाग ने भी माना, चयन समिति ने प्रक्रिया की दूषित
इस मामले में पेयजल निगम ने कार्मिक विभाग से दिशा निर्देश मांगे थे। कार्मिक विभाग ने भी 2023 में भेजे गए जवाब में लिखा है कि चयन समिति के सदस्य भले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं लेकिन उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को दूषित किया है। ऐसे में अभियंताओं के साथ ही चयन समिति से भी जवाब लेते हुए कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि कार्मिक विभाग ने यह भी माना था कि भले ही कितना भी समय व्यतीत हो जाए, अविधिक काम विधिक नहीं हो सकता। मामले में पेयजल निगम के एमडी रणवीर सिंह चौहान से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि नियुक्ति करने वाली समिति को नोटिस दिए गए थे, जिनमें से केवल एक का जवाब आया है। उन्होंने फिलहाल किसी तरह की कार्रवाई से इनकार किया।
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चार महिला इंजीनियरों को मिला नियमों का लाभ
2005 में चार महिला इंजीनियर मृदुला सिंह, मीशा सिंह, नमिता त्रिपाठी और पल्लवी कुमारी का चयन भी महिला आरक्षण संवर्ग में हुआ था। कार्मिक विभाग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि 2005 और 2007 में सहायक अभियंताओं के चयन के लिए विज्ञप्ति में महिला अभ्यर्थियों के लिए यह कहीं भी उल्लेखित नहीं था कि महिलाओं के लिए क्षैतिज आरक्षण मात्र उत्तराखंड राज्य की महिलाओं के लिए ही निर्धारित किया गया है। यह प्रावधान थे कि यदि कोई महिला किसी राज्याधीन लोक सेवा और पद पर मेरिट के आधार पर चयनित होती है तो उसकी गणना उस पद पर महिलाओं के लिए आरक्षित रिक्ति के प्रति की जाएगी। इसी आधार पर इन महिला अभियंताओं को राहत मिल गई है।