बदरीनाथ धाम के रावल के चयन के लिए ब्रिटिशकाल में बने मंदिर अधिनियम 1939 को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग उठने लगी है।
धार्मिक
स्थलों के प्रति लोगों की आस्था बनाए रखने के लिए सुयोग्य और विद्वानों को
उच्च पदों पर नियुक्त करने की बातें भी कही जा रही हैं। डिप्टी स्पीकर और
मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद मैखुरी भी मंदिर समिति के
अधिनियम और प्रभावी बनाने की जरूरत बताई है।
केदारनाथ के रावल को पूजा का अधिकार नहीं
जानकारों की मानें तो केदारनाथ के रावल के पास पूजा का अधिकार नहीं हैं। यहां रावल का पट्टाभिषेक पंचपुरी के पंचाचार्य करते हैं।
रावल
के अधीन पांच पुजारी होते हैं, जिनका चयन वे स्वयं करते हैं। श्रीबदरीनाथ
धाम में रावल की नियुक्ति मंदिर समिति करती है। समिति को रावल को हटाने का
अधिकार है। दोनों धामों में मंदिर समिति का एक ही एक्ट लागू होता है।
बदरीनाथ में रावल के व्यवहार पर पूछ-ताछ
बदरीनाथ के मुख्य पुजारी
(रावल) रहे वी केशवन नंबूदरी के व्यवहार के संबंध में जांच समिति स्थानीय
पंडे, पुजारियों से पूछताछ कर रही है। उस तक मिला-जुला फीड बैक पहुंचा है।
कुछ
दिल्ली में छेड़छाड़ के आरोप में फंसे रावल को किसी की दुर्भावना का शिकार
बता रहे हैं, जबकि कुछ के लिए वह अभी भी पूजनीय हैं। वह उन्हें षड़यंत्र
का शिकार बता रहे हैं।
जांच समिति के अध्यक्ष चंद्र किशोर मैठाणी के
अनुसार मामले में दिल्ली पहुंचने के बाद कुछ ऐसी बातें सामने आ सकती हैं,
जिनके बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं।
पीड़िता के परिचितों से भी
रावल और पीड़िता परिवार को लेकर पूछताछ करने की कोशिश होगी। इसके अलावा
अगर कानूनी जांच में कोई तथ्य सामने आता है तो उसे आधार बनाकर भी चला
जाएगा।
रावल के चयन को नहीं है कोई प्रावधान
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर
समिति ने इस मामले की जांच के लिए जो पांच सदस्यीय समिति बनाई है। उसे 15
दिन में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है, लेकिन ऐसा नहीं हो सकेगा। खुद
अध्यक्ष इस समय सीमा को कम मानते हैं।
श्री बदरीनाथ धाम के
धर्माधिकारी भुवन उनियाल का कहना है कि धाम में रावल के चयन को न तो कोई
प्रावधान है और न ही कोई बायलॉज। धाम में नियुक्त नायब रावल को ही रावल पद
पर आसीन किया जाता है। कोई सेवा अवधि भी तय नहीं है।
जांच कमेटी
दिल्ली में रावल से पूछताछ करेगी। इस संबंध में दिल्ली पुलिस से भी वार्ता
की जाएगी। हम एक्ट में किसी भी प्रावधान की बात नहीं कर रहे हैं। हम पूजा
और धर्माचरण को लेकर प्रभावी नियमावली पर बल दे रहे हैं। मैं अभी दिल्ली
में हूं। मंदिर समिति की बैठक में सभी विषयों पर चर्चा होगी।
- गणेश गोदियाल अध्यक्ष श्रीबदरी-केदार मंदिर समिति