मूल रूप से पौड़ी जिले के मदनपुर गांव निवासी न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया न्यायिक परिवार से हैं। 10 अगस्त 1960 को जन्मे न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया के पिता स्व. केशव चंद्र धूलिया इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज थे, जबकि उनके भाई तिग्मांशु धूलिया निर्माता-निर्देशक-अभिनेता हैं। न्यायमूर्ति दादा स्व. भैरव दत्त धूलिया स्वतंत्रता सेनानी के साथ ही उत्तराखंड की लैंसडौन विधानसभा से विधायक रह चुके हैं। न्यायमूर्ति धूलिया की प्रारंभिक शिक्षा देहरादून, इलाहाबाद और लखनऊ से हुई।
उन्होंने इलाहाबाद विवि से वर्ष 1981 में स्नातक किया। वर्ष 1983 में मास्टर्स इन मॉडर्न हिस्ट्री और वर्ष 1986 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इलाहाबाद हाईकोर्ट से की। उत्तराखंड गठन के बाद वह नैनीताल आ गए। यहां उन्हें पहले मुख्य स्थायी अधिवक्ता (सीएससी) के रूप में नियुक्ति मिली। उन्होंने बाद में अतिरिक्त महाधिवक्ता का दायित्व भी संभाला। जून 2004 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था। एक नवंबर 2008 को वह हाईकोर्ट के स्थायी न्यायमूर्ति बने।
न्यायमूति चौहान ने तेलंगाना में न्याय प्रणाली किए हैं बड़े सुधार
तेलगांना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राघवेंद्र सिंह चौहान ने अपने डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में न्याय प्रणाली में बहुत सुधार किए हैं। उन्होंने कोविड -19 प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य मामलों और झीलों के प्रबंधन जैसे प्रमुख मुद्दों को व्यवस्थित करने के प्रयास किए। लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों के लिए एक सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित कराने पर उनके प्रयास की सराहना की गई।
चीफ जस्टिस राघवेंद्र सिंह चौहान ने राजस्थान हाईकोर्ट में जून 2005 में न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। मार्च 2015 में कर्नाटक हाईकोर्ट में उनका तबादला कर दिया गया। वह एक वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में तेलंगाना हाईकोर्ट में आए और अप्रैल 2019 में तेलंगाना के चीफ जस्टिस बन गए।