लोकसभा चुनाव में टिहरी, प्रतापनगर, घनसाली और थौलधार क्षेत्रों में विकास के साथ ही टिहरी बांध से पैदा हुई समस्याएं मुख्य चुनावी मुद्दा बनेंगी। डैम विस्थापितों की समस्याओं को लेकर सभी दलों के नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ जाती हैं।
तस्वीरों में देखिए, 'पाताल' में भारत का एक मतदान केंद्र
इस सवाल को लेकर जहां कांग्रेस जनता के निशाने पर है वहीं, मुख्य विपक्षी दल भाजपा भी जनता के निशाने पर है। भले ही इन सवालों को लेकर मतदाता अभी पूरी तरह से खामोश है मगर 7 मई को मत प्रयोग करते वक्त मतदाताओं के जेहन में ये सवाल जरूर उठेंगे।
2000 में टिहरी डैम हुआ था शुरू
वर्ष 2000 में टिहरी बांध की झील के 42 किमी का आकार लेने के बाद जिले का भूगोल भी काफी हद तक बदल गया था। प्रतापनगर और घनसाली की बढ़ गई दूरी को कम करने के लिए पिछले 10 सालों में कोई खास परिणाम सामने नहीं आ पाए है।
बांध से आवागमन न होने से बढ़ी दूरी
बांध के ऊपर यातायात शुरू करने को लेकर 2006 व 08 में कई दिनों तक आंदोलन भी चला लेकिन कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल पाए।
बांध के ऊपर से आवागम न होने से घनसाली और प्रतापनगर क्षेत्र की जनता को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए 15 किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है।
हालांकि इस वर्ष दैवी आपदा से जिरो ब्रिज का यह मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने से इन दिनों वाहनों का आवागमन डैम टाप से ही हो रहा है।
इनका है कहना
चुनाव में विकास के साथ-साथ मंहगाई, भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दा होगा क्योंकि महंगाई बढ़ने से हर परिवार का बजट गड़बड़ाया है। मतदाओं को वोट मांगने आने वाले प्रत्याशियों से सवाल जरूर पूछना चाहिए कि वे लोकसभा में महंगाई रोकने और पहाड़ से पलायन रोकने के लिए नई विकास योजनाओं का विधेयक लाएंगे क्या।
-साहब सिंह सजवाण सर्वोदयी कार्यकर्ता
चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशी तमाम तरह के वायदे करते हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वे अक्सर जनता से किए वायदों को भूलकर अपनो का विकास करने की जुगत में जुट जाते हैं। टिहरी, घनसाली और प्रतापनगर क्षेत्र के बांध प्रभावितों की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हो पाया। सांसदों से इसका जवाब जरूर मांगना चाहिए।
-जय प्रकाश पांडेय अधिवक्ता