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उत्तराखंड: शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए खुद आवेदन नहीं कर सकेंगे शिक्षक, अब ये होगी प्रक्रिया

Mon, 25 Jun 2018 10:17 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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शैलेश मटियानी राज्य पुरस्कार के लिए अब शिक्षक खुद आवेदन नहीं कर सकेंगे। इसके बजाय सरकार प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। यह समिति रिजल्ट समेत अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के आधार पर पुरस्कार के लिए योग्य शिक्षकों को चिह्नित करेगी।

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शैलेश मटियानी राज्य पुरस्कार के लिए अभी प्रदेश के शिक्षक खुद आवेदन करते हैं। इसके लिए वह अपने कार्यों और उपलब्धियों की फाइल भी तैयार करते हैं। कुछ शिक्षक ऐसे हैं, जो स्कूल में पढ़ाना छोड़कर अन्य गतिविधियों में ही शामिल रहते हैं। ज्यादातर शिक्षकों की आवेदन फाइल में शैक्षणिक गतिविधियों के बजाय अन्य कार्यों का ब्योरा ज्यादा होता है।

इसको देखते हुए विभागीय स्तर पर आवेदन की प्रक्रिया को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। इसके बजाय प्रत्येक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति के गठन की योजना है, जो शिक्षकों को चिह्नित करेगी।
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समिति में सीईओ, बीईओ और शिक्षाविदों को शामिल किया जाएगा। चयन में परीक्षा परिणाम को प्राथमिकता में रखा जाएगा। वहीं, शैक्षणिक गतिविधियों पर भी फोकस रहेगा। यह समिति जिले से राज्य स्तर पर अपनी संस्तुति भेजेगी, जहां अंतिम तौर पर शिक्षकों को चिह्नित किया जाएगा।

टीचर ऑफ द मंथ को मिलेंगे एक लाख
सरकार अब हर माह टीचर ऑफ द मंथ का चयन करेगी, जिनके विद्यालय को पुरस्कार स्वरूप एक लाख रुपये की धनराशि दी जाएगी। इसके चयन के लिए डीएम की अध्यक्षता में समिति की गठित की जाएगी। पुरस्कार के रूप में मिलने वाली धनराशि का उपयोग विद्यालय संसाधन जुटाने में कर सकेंगे।
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