पहाड़वासियों के लंबे संघर्षों के बाद उत्तराखंड का गठन हुआ, लेकिन राज्य बनने के बाद पहाड़ के ही रहने वाले शिक्षकों, कर्मचारियों को पहाड़ पर जाने के लिए विशेष भत्ता देना इस राज्य की विडंबना बन गया है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को जीआईसी मेहूंवाला में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के अधिवेशन में यह बात कही। उन्होंने शिक्षकों को नसीहत देते हुए कहा कि प्रदेश में कई स्कूल बंदी की कगार पर हैं।
सरकारी स्कूलों में तीस हजार वेतन वाले शिक्षकों के बजाय अभिभावक निजी स्कूलों में महज 3000 रुपये मानदेय वाले शिक्षक के पास अपने बच्चों को भेजकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। शिक्षकों के स्कूल से नदारद रहने पर चिंता जताने के बाद सीएम ने शिक्षकों से ही पूछा, ‘कोई मुझे बताए कि शिक्षक स्कूल कैसे पहुंचेंगे?’
सीएम ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी अकसर कुमाऊंनी गीत अल्मोड़ा की लाल माटी की सीढ़ी... गुनगुनाते हैं। कहा कि यही हाल शिक्षा विभाग का हो गया है।
लाल मिट्टी की सीढ़ी पर कोई चढ़ने के लिए जितना जोर लगाता है, उतना ही तेजी से फिसलकर जमीन पर जा गिरता है। प्रदेश में करोड़ों खर्च कर हाईस्कूल, इंजीनियरिंग कालेज, आईटीआई खुले हैं। लेकिन इन पर लगी पूंजी के मुकाबले स्थिति सुधरने के बजाए बिगड़ती जा रही है।
...तो हो जाएंगे बाल साफ
मुख्यमंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि विभाग में इतना सब होने के बावजूद शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी के बाल न जाने कैसे काले ही बने हुए हैं। कहा कि विभाग की स्थिति से मैं इतना चिंतित हूं कि कुछ और वर्षों तक सीएम रहा तो मेरे पूरे बाल साफ हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि विभाग की बदहाली देख उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में वे सबसे अधिक चिंतित व्यक्ति हैं।
मैं आखिरी दम तक लड़ने वाला हूं
कर्मचारियों की हड़ताल और सरकार पर कमजोर होने के आरोपों की ओर इशारा करते हुए सीएम ने कहा कि कुछ लोग गलतफहमी में हैं, कुछ नारेबाजी से परेशान करना चाहते हैं, लेकिन मैं इससे नहीं डरता। मैंने खुद जीवन भर यही सब किया है। मैं आखिरी दम तक लड़ने वाला व्यक्ति हूं।
चिंताराम और भीम सिंह बिष्ट हैं मेरे गुरुजी
सीएम ने कहा कि छोटी कक्षाओं में बच्चा जो सीखता है, उससे ही उसका भविष्य तय होता है। बताया कि प्राथमिक शिक्षा के दौरान उनके गुरु चिंताराम और भीम सिंह बिष्ट ने जो सिखाया वह उन्हें अब तक याद है।
सुबह-सुबह चाय का प्याला डगमगाने लगता है
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें हर रोज अखबारों की हेडिंग ‘गरजे शिक्षक’ डरा देती है। सुबह-सुबह चाय का प्याला डगमगाने लगता है। सीएम ने कहा कि वे सब कुछ करने के लिए तैयार हैं, लेकिन शिक्षक भी तो उनका मनोबल बढ़ाने के लिए तैयार हों। कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों में प्रॉक्सी टीचर रखने के मामले सामने आ रहे हैं, यह ठीक नहीं है।
कहा था न, मुझे मत बुलाना
सीएम ने जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ पदाधिकारियों से कहा, मैंने पहले ही कहा था न कि मुझे किसी समारोह में न बुलाया जाए। बता भी दिया था कि दिल से कुछ कह दूंगा तो आप लोग परेशान हो जाएंगे। फिर भी आपने बुला ही लिया।
जूनियर को माध्यमिक कहते रहे सीएम
अधिवेशन जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ का था, लेकिन पूरे कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बार-बार माध्यमिक के शिक्षक बोलते रहे।