उत्तराखंड में शिक्षा विभाग की व्यवस्था ने ऐसा असंतुलन बना दिया है कि कहीं एक छात्र पर दो शिक्षक रखे गए हैं तो किसी विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण कई विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित है।
जिले में कुल 602 प्र्राथमिक स्कूल हैं। इनमें शिक्षकों के 1066 पद स्वीकृत हैं, लेकिन मात्र 829 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षकों के 237 पद खाली पड़े हैं। शिक्षकों की तैनाती में असंतुलन की बानगी बागेश्वर ब्लाक में देखी जा सकती है। जो जिला मुख्यालय से टच होता है।
यहां कई स्कूल ऐसे हैं जहां सिर्फ एक छात्र है। जबकि सौ बच्चों वाले स्कूल में मात्र दो अध्यापक पढ़ाने को रखे गए हैं। इस ब्लाक में 238 प्राथमिक स्कूलों में पांच हजार छात्र अध्ययनरत हैं। मानकों के अनुसार 30 छात्रों पर कम से कम एक शिक्षक होना चाहिएख् लेकिन शिक्षा विभाग ने अपने ही मानकों की धज्जियां उड़ा रखी हैं।