नियमों को दरकिनार कर प्रदेश में किए गए शिक्षकों के 66 अटैचमेंट को आखिर निरस्त कर दिया गया। कई दिन तक चले विवाद के बाद शिक्षा निदेशक चंद्र सिंह ग्वाल ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया।अटैच किए गए सभी शिक्षकों को अब मूल तैनाती वाले स्कूलों में लौटना होगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इन अटैचमेंट पर कड़ी नाराजगी जताई थी।खबर का असर
अमर उजाला ने 25 अगस्त के अंक में ‘चहेते शिक्षक सुगम स्कूलों में अटैच’ शीर्षक से प्रकाशित खबर में खुलासा किया था कि विभागीय अधिकारियों ने 50 चहेतों को सुगम स्कूलों में पहुंचाने का आदेश जारी कर दिया था।कक्षा संचालन के नाम पर पहाड़ के दुर्गम स्कूलों से 35 शिक्षक दून और 15 शिक्षक हरिद्वार में अटैच किए गए। पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से इन शिक्षकों को संबद्ध किया गया था। इनके अलावा पर्वतीय जिलों में 16 अन्य शिक्षकों को मिलाकर कुल 66 शिक्षकों को अटैच किया गया था।अपर निदेशक ने दिए थे निर्देश
अपर निदेशक गढ़वाल मंडल रामकृष्ण उनियाल ने 22 अगस्त को इन शिक्षकों को व्यवस्था के तौर पर आवंटित जिलों के लिए कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए थे। बताया जा रहा है कि ये आदेश शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी के आदेश पर किए गए थे।इस मसले पर शिक्षकों ने कड़ी नाराजगी जताई। राजकीय शिक्षक संघ शिक्षा निदेशालय पर कई दिन से धरना-प्रदर्शन कर रहा है। सीएम हरीश रावत ने भी अटैचमेंट निरस्त करने का आदेश दिया था। लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही थी। अब शिक्षा निदेशक सीएस ग्वाल ने संबंधित अटैचमेंट निरस्त करने का आदेश दे दिया है।