टैक्सी-मैक्सी संचालकों की मांगों पर अब तक शासन स्तर से हुई कार्रवाई से यूनियनें संतुष्ट नहीं हैं।
मांगों के शासनादेश जारी करने की मांग पर अड़े
दरअसल अभी तक कुछ ही मांगों के शासनादेश हुए हैं जबकि उत्तराखंड के टैक्सी-मैक्सी संचालक सभी मांगों के शासनादेश जारी करने की मांग पर अड़े हैं।
यूनियन ने गुरुवार को भी सभी मांगों के शासनादेश की कापी की मांग विभाग के समक्ष रखी। प्रमुख सचिव परिवहन एस रामास्वामी ने बताया कि यूनियन के पदाधिकारियों से बात हुई थी। कुछ मांगों पर तकनीकी या कानूनी राय की जरूरत है, हमने आश्वस्त किया है कि जल्द उनका निस्तारण हो जाएगा।
ग्रीन कार्ड की सुविधा में बढ़ी राहत
शासन ने बिना ग्रीन कार्ड वाहन धारकों की टैक्स माफी के आदेश जारी करने के साथ रीजनल परमिट की मांग का बुधवार को शासनादेश जारी कर दिया था। इतना ही नहीं इस शासनादेश में प्रदेश के सभी 18 संभागीय और सहायक संभागीय कार्यालयों को ग्रीन कार्ड देने का प्रावधान है।
इससे ग्रीन कार्ड के लिए व्यवसायिक वाहन संचालकों की देहरादून, ऋषिकेश और कोटद्वार पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी। 10 जमा 1 सीट वाहन के परमिट के लिए तकनीकी कमेटी गठित करने के साथ बिना टैक्सी नंबर वाहनों के संचालन पर पूर्ण रोक के लिए शासन ने परिवहन कार्यालयों को निर्देश दिए हैं।
कमर्शियल लाइसेंस रिन्यू करने के लिए रिफ्रेशर कोर्स की बाध्यता की मांग पर भी शासनादेश जारी हो गया है।
विचाराधीन नहीं आदेश चाहिए
टैक्सी-मैक्सी कैब संचालकों की नियम 71 में बदलाव की मांग वैधानिक मसला होने के चलते शासन उसमें जल्दबाजी नहीं करना चाहता। इसी के साथ वाहनों की अधिकतम आयुसीमा 12 से 15 वर्ष करने का मसला भी विचाराधीन है।
आपदा के दौरान यात्रियों को लाने में लगी टैक्सी-मैक्सी के बकाया भुगतान के लिए यूनियनों से विभाग ने संपूर्ण विवरण सहित जरूरी दस्तावेज मांगे हैं, जिसके बाद भुगतान का आश्वासन दिया है।
हर जिले में ड्राइविंग स्कूल खोल कर लाइसेंस नवीनीकरण के लिए झाझरा ड्राइविंग स्कूल की बाध्यता का विकल्प मिलने बिना वाहन संचालक मानने को तैयार नहीं हैं।