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ताशी-नुंग्शी की जिद के आगे झुक गई चोटियां

Thu, 18 Dec 2014 12:31 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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चार साल पूर्व ताशी-नुंग्शी ने जब पहली बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने की बात कही थी तो पिता वीके मलिक ने बेटियों से प्रशिक्षक के कोर्स पर मन लगाने को कहा। मां अंजू मलिक तो पर्वतारोहण के सख्त खिलाफ थीं, लेकिन बेटियों की जिद के आगे दोनों झुक गए।
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और सिर्फ वही नहीं झुके, जुडवां बहनों ने मजबूत इरादों और जज्बे के दम पर एवरेस्ट समेत दुनिया की सात सबसे ऊंची चोटियों को अपने कदमों पर झुका दिया। बेटियों की कामयाबी ने आज मां-पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

हॉकी और एथलेटिक्स खिलाड़ी ताशी-नुंग्शी के पर्वतारोहण की शुरुआत वर्ष 2009 में उत्तरकाशी स्थित नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (एनआईएम या निम) में बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स के दौरान हुई। पिता कर्नल वीके मलिक (रि.) ने बताया कि दोनों बहनों ने कहा कि हमें एवरेस्ट चढ़ना है तो मैं चौंक गया। पहले लगा कि दोनों छोटी हैं।
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इसीलिए पहले कोर्स पूरा करने पर ध्यान देने के लिए कहा। मां अंजू थापा मलिक ने तो साफ इनकार कर दिया। वर्ष 2010 में दोनों ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्कीइंग एंड माउंटेनियरिंग गुलमर्ग से स्कीइंग का कोर्स किया।

2012 में दयारा ग्लेशियर में 10 दिन का कोर्स किया और फिर उत्तरकाशी में सर्च एंड रेस्क्यू एडवांस के बाद प्रशिक्षक के कोर्स के लिए एडमिशन लिया। वर्ष 2012 में दोनों ने फिर एवरेस्ट चढ़ने की जिद की, लेकिन मां नहीं मानी।

इस बीच माता-पिता दोनों को कोर्स के लिए उत्तरकाशी छोड़ने गए तो एक प्रशिक्षक उन्हें देखते ही गेट पर लेने पहुंच गए। संस्थान के शिक्षक, प्रधानाचार्य ने भी काफी तारीफ की। इसके बाद मां अंजू ने एवरेस्ट मिशन के लिए हामी भरी और अक्तूबर 2012 से मिशन शुरू हो गया।

मां बनाने लगी गोंद के लड्डू

कभी लड़की समझकर पहाड़ चढ़ने से मना करने वाली अंजू थापा मलिक बेटियों का मिशन पूरा होने के बाद खुशी रोक नहीं पा रहीं। दोनों के लिए गोंद के लड्डू, पिन्नी बनाना शुरू कर दिया है। अंजू मलिक ने कहा कि दोनों बहुत दुबली थीं।

उत्तरकाशी में निम से जब भी छुट्टी पर घर आती, दोनों के हाथ सूजे हुए होते थे। दोनों बहुत कमजोर थीं। डर लगता था कि वजन कैसे उठा सकेंगी, इसीलिए मना करती थी। लेकिन दोनों ने जिद की और अपना सपना आज पूरा कर लिया।

नानी विद्या थापा भावुक होते हुए बोली, बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं होता। बताया कि बच्चियों के एवरेस्ट पर चढ़ने के दौरान डर लगा था। हर दिन मंदिर में पूजा करती थीं, लेकिन इसके बाद कोई डर नहीं रहा।

उधारी के कपड़ों से सफर हुआ शुरू ताशी-नुंग्शी के एवरेस्ट चढ़ने के लिए कपड़े और अन्य उपकरण निम ने ही दिए थे। उधारी के कपड़े पहनकर और उपकरणों के साथ पहली बार में ही दोनों बहनों से एवरेस्ट की चढ़ाई की।

इसके बाद इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन नई दिल्ली से कपड़े और उपकरण किराये पर लेकर दोनों बहनों ने सफर जारी रखा। इस दौरान कभी कपड़े तो कभी बड़े साइज के जूते दोनों को एडजस्ट करने पड़े।

माइनस 40 डिग्री भी ठंडा नहीं कर पाया जोश

-40 (माइनस 40) डिग्री तापमान में ताशी-नुंग्शी ने अंटार्कटिका के स्थानीय समय के अनुसार 16 दिसंबर की शाम चार बजे (भारतीय समयानुसार 17 दिसंबर की रात 12:30 बजे) माउंट विनसन फतह की।

थाली बजाकर खुशी का इजहार करने के साथ ही दोनों बहनों ने चोटी पर तिरंगा फहराया। दोनों बहनों का लक्ष्य 18 दिसंबर (गुरुवार) की शाम तक बेस कैंप पर पहुंच जाएंगी।

इसके बाद ‘दुनिया की हद तक...’
विश्व की सबसे ऊंची सात पर्वत चोटी फतह करने के तुरंत बाद ताशी-नुंग्शी अब साउथ पोल के मिशन पर रवाना होंगी। 19 दिसंबर से शुरू हो रहे मिशन को दोनों बहनों ने ‘ऊंचाइयों से आगे दुनिया की हद तक...’ नाम दिया है।

इसके जरिये वे दुनिया को बालिकाओं के सशक्त होने का संदेश देना चाहती हैं। यह मिशन महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी प्रायोजित (स्पांसर) कर रही है। खास बात यह है कि 29 दिसंबर को खत्म होने वाले इस मिशन के लिए दोनों बहनें 120 किलोमीटर तक स्कीइंग करेंगी।

बिना किसी पोर्टर की मदद के वे खुद 70 किलो वजन उठाकर जाएंगी। इस दौरान अत्यधिक वायु दबाव और 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली बर्फीली हवाओं का सामना उन्हें करना होगा।
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मॉडलों ने ताशी नुंग्शी को बनाया राशि नुंग्शी

‘मिस उत्तराखंड कांटेस्ट’ के जरिये फिल्म, फैशन की दुनिया में छाने का ख्वाब देख रही युवतियों को उत्तराखंड की सामान्य जानकारी भी नहीं है। प्रतियोगिता के ‘एडवेंचर राउंड’ में जब उनसे प्रदेश के पर्यटन, रोमांचक खेलों से जुड़े सवाल पूछे गए तो अधिकतर माडलों ने चुप्पी साध ली।

कुछेक ने जवाब दिए, लेकिन गलत। स्पर्धा के निर्णायक तब हैरान रह गए, जब एक माडल ने एवरेस्ट विजेता जुड़वां बहनों ताशी-नुंग्शी के नाम राशि और नुंग्शी बता डाले। यह सुनकर आयोजक भी शर्मिंदा होते दिखे। किसी तरह राउंड पूरा किया गया। निर्णायकों की भूमिका में पंखुड़ी मलासी, मनोज और किरण भट्ट रहे।

25 को चुनी जाएगी मिस उत्तराखंड
मिस उत्तराखंड का ग्रैंड फिनाले 25 दिसंबर को होगा। इससे पहले दो उप स्पर्धाएं (सब-टाइटल्स) होनी हैं। आयोजक राजीव मित्तल ने बताया कि स्टाइल आइकन और मिस पर्सनेलिटी के बाद 25 दिसंबर को ग्रैंड फिनाले होगा।

बताया कि अगली बार से 21 की जगह 22 सब-टाइटल्स होंगे। इनमें ब्यूटी विद परपज नया सब-टाइटल जोड़ा जाएगा जो मिस इंडिया स्तर पर होता है।

माडलों के जवाब वाकई हैरान करने वाले थे। अगली बार ध्यान रखेंगे कि व्यक्तित्व विकास (पर्सनेलिटी डेवलपमेंट) के साथ ही सामान्य ज्ञान की कक्षाएं भी दी जाएंगी।
- दिलीप सिंधी, सिन्मिट कम्यूनिकेशन (आयोजक संस्था)
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