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उधार लेकर देश का नाम ऊंचा करने चली बहनें

Sat, 10 May 2014 01:13 AM IST
अंशुल डांगी/अमर उजाला, देहरादून
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एवरेस्ट समेत दुनिया की सात सबसे ऊंची चोटियों में पांच पर तिरंगा लहरा चुकी जुड़वा बहनें ताशी-नुंग्शी एक फिर शिखर छूने चल पड़ी हैं। मगर उनके हाथों में सिर्फ लोगों की दुआएं हैं।
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स्पांसर न मिल पाने के बावजूद अपने लक्ष्य पर समर्पित ताशी-नुंग्शी उधार लेकर देश का झंडा बुलंद करने 20237 फीट ऊंचे माउंट मेकिनली (अमेरिका) के लिए निकल रही हैं।

स्पांसर न मिलने से दोनों निराश तो हैं, लेकिन हताश नहीं। निगाहों में है सिर्फ अपना लक्ष्य और उसे पाने के लिए भरपूर उत्साह।

जाने से पहले शुक्रवार को अमर उजाला से ताशी-नुंग्शी ने खास बातचीत की। ताशी ने बताया कि उन्हें अभी स्पांसर नहीं मिला है। अभियान में 15 लाख से अधिक खर्च का अनुमान है।
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10 लाख रूपए लिए हैं उधार

ताशी-नुंग्शी ने कहा कि पिता वीएस मलिक ने अभियान के लिए 10 लाख से अधिक रुपये उधार लेकर साजोसामान खरीदा। इसके बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया, लेकिन हमें यह पता है।

वे रात भर जागकर हमारे सफर के लिए काम करते हैं, जिसे देखकर हमें प्रेरणा मिलती है। हालांकि हम पर हो रहा खर्च देख बुरा भी लगता है।

ताशी ने बताया कि 10 मई को वे दिल्ली रवाना होंगी, जहां से 16 मई को एंकोराज से बेस कैंप पहुंचेंगी। दोनों बहनें नए सफर को अब तक का सबसे खतरनाक मान रही हैं।

बहनों को जूझना होगा इन चुनौतियों से

- ताशी-नुंग्शी ने बताया कि माउंट मेकिनली को देनाली के नाम से भी जाना जाता है। इसका बेस कैंप ही 15 हजार फीट से अधिक ऊपर लगेगा।
- कई बार यहां तापमान -40 डिग्री से भी नीचे चला जाता है। इतनी ठंड में कपड़े, ग्लब्स भी बेअसर हो जाते हैं।
- बॉडी में थोड़ी भी हवा लगने पर फॉसबेक नाम की बीमारी हो सकती है। इसमें शरीर गलने लगता है।
- इस पहाड़ी का स्लोप 80 से 90 डिग्री तक स्ट्रेट है। साथ ही एवलॉस (बर्फ का गोला) भी आते रहते हैं। स्नो स्ट्रॉम भी होता है।
- पिट्ठू बैग में सामान के साथ ही 30 किलो से अधिक भार का स्लेज खुद ले जाना होगा। इसमें खाना आदि होगा।

ये है मिशन 2 फॉर 7
एवरेस्ट (नेपाल), किलिमंजारो (दक्षिण अफ्रीका), एल्ब्रुस (यूरोप), अकंग कगवा (दक्षिण अमेरिका), कर्सटेन पिरमिड (ऑस्ट्रन एशिया), माउंट मेकिनली (उत्तरी अमेरिका), बिनसन मेसेस (अंटार्कटिका)

ये हो चुके फतह- (पहली बार में ही)
एवरेस्ट,  किजिमंजारो, एल्ब्रुस, अकंग कगवा, कर्सटेन पिरमिड

सम्मान तो मिला, पर स्पांसर नहीं

दोनों जुड़वा बहनों को एक बार आदित्य बिड़ला ग्रुप ने 7 लाख रुपये मदद की। वहीं 2013 में तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने भी 5-5 लाख रुपये देकर सम्मानित किया।

हेरिटेज स्कूल चेयरमैन अवधेश चौधरी ने भी एक लाख की मदद की है। मगर दोनों को अभी भी स्पांसर की तलाश है। हालांकि ओएनजीसी ने मिशन 2 फॉर 7 पूरा करने पर सम्मानित करने का भरोसा दिया।

लड़कियों को समर्पित है मिशन
ताशी-नुंग्शी का मिशन 2 फॉर 7 लड़कियों को समर्पित है। ताशी ने बताया कि वे दुनिया को मैसेज देना चाहती हैं कि लड़कियां कमजोर नहीं हैं। वे कुछ भी कर सकती हैं। बस उन्हें सपना पूरा करने के लिए प्रेरणा और सहयोग की जरूरत है।
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ऑल द बेस्ट...ताशी-नुंग्शी!

‘ऑल द बेस्ट’..., नया इम्तिहान है, फतह कर बढ़ाओ देश और राज्य का नाम...। दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी माउंट मेकिनली के खतरनाक सफर में निकल रही दून की जुड़वा बहनों ताशी और नुंग्शी को हेरिटेज स्कूल के बच्चों ने यह शुभकामनाएं दी।

स्कूल चेयरमैन अवधेश चौधरी ने दोनों बहनों को एक लाख रुपये का चेक देकर सम्मानित किया।

शुक्रवार सुबह 10 बजे हेरिटेज स्कूल में ताशी-नुंग्शी पहुंचीं तो स्कूल के बच्चों ने उनका स्वागत किया। चेयरमैन अवधेश चौधरी ने बुके देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि दोनों बहनों ने कम उम्र में बेहद साहसिक काम चुना है।
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