मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वीकार किया है कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। तमिलनाडु और महाराष्ट्र के डॉक्टरों की उत्तराखंड में सेवाएं लिए जाने की कवायद की जा रही है।
दिल्ली के डॉक्टरों की हेरी हास्पिटल के माध्यम से सप्ताह में दो दिन उत्तराखंड में सेवाएं लिए जाने के विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं। इसके अलावा 200 एमबीबीएस डॉक्टरों की सेवाएं दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में दी जाएंगी।
बुधवार को नैनीताल क्लब में पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से नैनीताल, हरिद्वार और देहरादून शहरों में बिजली की अंडर ग्राउंड केबल लाइन बिछाने के लिए केंद्र की ओर से स्वीकृति मिल चुकी है। इसमें 1100 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। यह कार्य जल्द ही शुरू होगा।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय रसायन मंत्री ने उत्तराखंड में सेंट्रल प्लास्टिक टेक्नोलॉजी संस्थान खोलने की अनुमति दे दी है इसके लिए जगह तलाशने का काम तेजी से चल रहा है। सीएम ने कहा कि अस्पतालों में मरीजों को खून की कमी की वजह से परेशानी उठानी पड़ती है जबकि कई लोग खूब का व्यापार करते हैं जो गलत है।
अब सरकार इस पर अंकुश लगाने जा रही है। अल्मोड़ा और श्रीनगर के मेडिकल कॉलेजों को आर्मी कॉलेज के रूप में विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है। उत्तराखंड में नए जिलों के सवाल पर सीएम ने कहा कि फिलहाल इस बारे में सरकार की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है। पलायन को रोकने के लिए गांवों में किसानों को कम ब्याज पर ऋण देने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।