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अब बच्चों को 'कब्जे' में ले रहा स्वाइन फ्लू

Sun, 15 Feb 2015 07:48 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी देहरादून में स्वाइन फ्लू का खतरा अब नौनिहालों पर भी मंडराने लगा है।
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दून अस्पताल में इस घातक बीमारी के प्राथमिक लक्षण वाले दो बच्चे भर्ती किए गए हैं। उनका इलाज चल रहा है। स्वाइन फ्लू के बढ़ते संक्रमण और राजधानी के एक व्यक्ति की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और लोगों की चिंता बढ़ गई है।

उस पर यह खतरा अब बच्चों की ओर भी बढ़ने लगा है। शनिवार को दून अस्पताल में स्वाइन फ्लू के प्राथमिक लक्षण वाले दो बच्चों को भर्ती कराया गया है। अस्पताल के कार्यवाहक प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीएस रावत ने बताया कि दोनों बच्चों की सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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बताया कि दोनों बच्चों को टेमी फ्लू दवा की खुराक देनी शुरू कर दी गई है, हालांकि संक्रमण की आशंका के चलते अभी उन्हें आइसोलेशन वार्ड में नहीं रखा गया है। बताया कि जल्द ही दोनों बच्चों के खून के नमूने जांच के लिए भेजेंगे।

एक मरीज की रिपोर्ट निगेटिव
स्वाइन फ्लू के नोडल अधिकारी डॉ. प्रवीण पंवार ने बताया कि दून अस्पताल में भर्ती ऋषिकेश निवासी मरीज की दिल्ली प्रयोगशाला से रिपोर्ट आ गई है। मरीज में स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है। बताया कि दून अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में अब भी चार संदिग्ध रोगी भर्ती हैं। इनकी रिपोर्ट आनी बाकी है।

अस्पतालों में बढ़े बाल रोगी

दो बच्चों में स्वाइन फ्लू की आशंका के बीच दून अस्पताल में लगातार बढ़ रही बाल रोगियों की संख्या ने स्वास्थ्य विभाग की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी दून अस्पताल में बच्चों की ओपीडी में आमतौर पर प्रतिदिन औसतन डेढ़ सौ बाल रोगी आते हैं। लेकिन इन दिनों यह आंकड़ा प्रतिदिन ढाई सौ के पार पहुंच रहा है।

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चिकित्सकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दे रहे हैं। दवाओं की उपलब्धता पर भी नजर रखी जा रही है। दून अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेपी देवशाली के मुताबिक ज्यादातर सर्दी-जुकाम और बुखार से पीड़ित बच्चे आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू के खतरे को देखते हुए इन दिनों बच्चों की सेहत के प्रति खास एहतियात बरतना जरूरी है।

बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम
डॉ. देवशाली ने बताया कि इन दिनों जैसा मौसम है, उसमें स्वाइन फ्लू का वायरस सर्वाधिक सक्रिय रहता है। बच्चों में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में वे सर्दी-जुकाम, वायरल की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। लेकिन, समय से और सही इलाज नहीं मिला तो बच्चों पर स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसे करें बचाव
: बच्चों को भीड़भाड़ में ले जाने से बचें
: बच्चों में संक्रमण तेजी से फैलता है, उनके सामने छींके नहीं
: बच्चों के कपड़े सबसे अलग रखें
: बच्चों को छूने, पकड़ने या भोजन देने से पहले हाथ अच्छी तरह धुलें
: सर्दी-जुकाम, बुखार हो तो तत्काल डाक्टर को दिखाएं
(डॉ. जेपी देवशाली के मुताबिक)
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गर्भवती स्वाइन फ्लू रोगी को अस्पताल से लौटाया

गर्भवती महिला के जांच में स्वाइन फ्लू पॉजीटिव निकलने पर दिल्ली के अस्पताल ने लौटा दिया। परिजनों ने उसी अस्पताल की शहर में चल रही शाखा से संपर्क किया तो वहां के जिम्मेदारों ने हाथ खड़े कर दिए। रोगी बहुत देर तक एंबुलेंस में ही पड़ी रही। बाद में रोगी को हिमालयन इंस्टीट्यूट जौलीग्रांट में भरती किया गया।

दर्शनी गेट निवासी छह माह की गर्भवती शिखा की तबियत बिगड़ने पर परिजन उसे दिल्ली के एक अस्पताल ले गए। वहां जांच में रोगी स्वाइन फ्लू पॉजीटिव निकली। इस पर डॉक्टरों ने रोगी को यह कहकर लौटा दिया कि अस्पताल स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए अधिकृत नहीं है। इस पर परिजन उसे वापस ले आए। डॉक्टरों ने कहा था कि रोगी को वेंटीलेटर की जरूरत पड़ सकती है।

दून अस्पताल से संपर्क करने पर कहा गया कि इमरजेंसी में लगे वेंटीलेटर खाली नहीं है और स्वाइन फ्लू वार्ड में कोई वेंटीलेटर नहीं है। दून महिला चिकित्सालय में भी वेंटीलेटर की सुविधा नहीं है। रोगी के पति सचिन ने परेशान होकर भाजयुमो प्रांतीय यूथ एंबेसडर राजेंद्र सिंह ढिल्लो ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फोन किया तो सबने हाथ खड़े कर लिए।

रोगी को लेकर जौली ग्रांट पहुंचे। यहां डाक्टरों ने कहा कि रोगी की स्थिति बिगड़ी तो वेंटीलेटर खाली नहीं है। लेकिन रोगी को स्वाइन फ्लू वार्ड में भरती कर लिया गया। सीएमओ डॉ. एसपी अग्रवाल ने कहा कि उनके पास जो भी व्यवस्था है दून अस्पताल में ही है। ढिल्लो ने कहा कि मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सरकार स्वाइन फ्लू रोगियों के लिए एक वेंटीलेटर का इंतजाम नहीं कर सकी।
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