अपने जुनून और लोगों की मदद से शिक्षिका रीता सेमवाल ने वर्ष 1962 में स्थापित राजकीय प्राथमिक विद्यालय नीलकंठ को छह माह में ही पब्लिक स्कूल जैसा बना दिया है।
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अब रीता इसे राज्य का मॉडल राजकीय प्राथमिक स्कूल बनाना चाहती हैं। पौड़ी जिले में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय नीलकंठ शिक्षा विभाग के मानकों के अनुसार आता तो सुगम श्रेणी में है। लेकिन संसाधन और भौगोलिक परिस्थितियों के लिहाज से दुर्गम से कम नहीं है।
इस स्कूल में छह माह पहले स्थानांतरित होकर आई 50 साल की रीता सेमवाल ने विद्यालय की ऐसा कायाकल्प की है कि उसे देखकर यकीन नहीं होता कि यह सरकारी स्कूल है। स्कूल के निरीक्षण पर आए खंड जिला अधिकारी (बीईओ) भी हतप्रभ रह गए। उनकी रिपोर्ट पर मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) पौड़ी ने भी शिक्षक को विभागीय स्तर पर सहयोग का भरोसा दिया है।
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रीता सेमवाल ने बताया कि जब वह इस स्कूल में आई थी तो यहां 43 बच्चे जमीन पर चटाई बिछाकर पढ़ते थे। स्कूल की दीवारें बदरंग थी। प्रयोगशाला, लाइब्रेरी और फर्नीचर कुछ नहीं था। उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास करके पहले बच्चों के बैठने के लिए कुर्सी-मेज जुटाई। निजी तौर पर लाइब्रेरी बनवाई और उसमें किताबों की व्यवस्था की।
स्कूल भवन को रंगरोगन कर नया कलेवर दिया। शिक्षण अधिगम सामग्री (टीएलएम) के लिए प्रयोगशाला तैयार की। स्कूल के ड्रेस कोड में एकरूपता लाने का प्रयास किया।
प्रेरित होकर लोगों ने किया सहयोग
रीता ने स्कूल को व्यवस्थित करने की पहल की तो ग्रामसभा और अन्य लोग भी सहयोग को आगे आए। पूर्व प्रधान राजकुमारी देवी, धनवीर सिंह, नीलकंठ मंदिर समिति और व्यापार मंडल आदि प्रमुख हैं।
विद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष ने शिरकत की तो पांच लाख के सहयोग की घोषणा की। रीता ने बताया कि वह कंप्यूटर शिक्षा शुरू करना चाहती हैं।
चौंरखाल स्कूल का कर चुकी हैं कायाकल्प रीता इससे पहले राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौंरखाल (पाबौं) में बतौर प्रधानाध्यापिका तैनात रही हैं। उन्होंने इस विद्यालय को व्यवस्थित किया था। तत्कालीन सीईओ भूपेंद्र सिंह नेगी, डीईओ शिवप्रसाद सेमवाल ने उनके कार्यों को न केवल सराहा बल्कि स्कूल की फोटोग्राफी कराकर दूसरे जनपदों में तैनाती के दौरान अन्य शिक्षकों को ऐसे कार्य के लिए प्रेरित किया।
तल्ख टिप्पणियां बनी प्रेरक रीता सेमवाल को शिक्षा के क्षेत्र में नवीन प्रयोगों की प्रेरणा समाज से ही मिली। बताती हैं कि कई लोग सरकारी स्कूलों की दशा और शिक्षकों की भूमिका पर टिप्पणियां करते हैं, जिसने उन्हें आहत किया। इसी से उन्हें कुछ नया करने की प्रेरणा मिली।
नीलकंठ मंदिर समिति, नीलकंठ क्षेत्र के महात्मा मंगल गिरि महाराज, बाबा काली कमली धर्मशाला के प्रबंधक राजेंद्र सिंह चौहान, सिद्धबली मंदिर के महात्मा प्रीतम गिरि, नीलकंठ गिरि, बारह ज्योर्तिलिंग मंदिर के दर्शन पुरी, व्यापार मंडल नीलकंठ, ग्राम प्रधान संगठन के संरक्षक शोभाराम रतूड़ी, पुंडरासू निवासी अभिभावक राजेश रावत, ग्रामसभा तोली प्रधान रविंद्र सिंह नेगी और बच्चों के अभिभावकों का संयुक्त सहयोग।
विद्यालय को संवारने के लिए शिक्षिका रीता सेमवाल बेहतर कार्य कर रही हैं। इससे स्कूल से बच्चों का पलायन रुकेगा। दूसरे शिक्षकों को भी विद्यालयों के प्रति इस ध्येय को अपनाना चाहिए। - कुलदीप गैरोला, मुख्य शिक्षा अधिकारी, पौड़ी गढ़वाल
पांच छह महीने में ही हमारा स्कूल बदल गया है। पढ़ाई अच्छी होने लगी है। भोजन माता, गुरुजी, मैडमजी सब अच्छे हैं। पहले हम चटाई पर बैठते थे, अब मेज-कुर्सी पर बैठना अच्छा लगता है। लाइब्रेरी क्या होती है, अब पता चला। - निकीता, विद्यार्थी कक्षा पांच
स्कूल में निजी विद्यालयों के अनुरूप फर्नीचर, गणवेश, स्वच्छता, अनुशासन बेहतर हुआ है। उम्मीद है कि इससे शिक्षा का स्तर सुधरेगा। यह सब प्रधानाध्यापिका और उनके सहयोगियों के प्रयासों से संभव हो पाया है। - रवींद्र सिंह रावत, अभिभावक एवं प्रधान ग्रामसभा तोली