फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्लास बंक कर स्कूली बच्चों ने नशे में किया ‘बैंग बैंग’

Tue, 14 Oct 2014 03:18 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
घर से यूनिफॉर्म पहन और बस्ता लेकर पढ़ने निकले 30 स्कूली छात्र क्लास बंक कर बैंग बैंग फिल्म देखने पहुंच गए।
विज्ञापन


सिनेमा हॉल में इनमें से कुछ बेटिकट और नशा करते पकड़े गए। उनसे सूंघने वाली नशा सामग्री बरामद हुई। पुलिस ने इन बच्चों को कड़ी नसीहत के बाद स्कूल प्रबंधनों को सौंप दिया।

सोमवार को नटराज सिनेमा में बैंग बैंग फिल्म के शो के दौरान स्कूल यूनिफार्म में पहुंचे आठ छात्र बिना टिकट पकड़े गए। हाल कर्मचारियों ने उन्हें बाहर कर दिया।
विज्ञापन


इनमें से कुछ हाथों में नशीली सामग्री और फेविकोल का डिब्बा लिए हुए थे। पता चला कि ये बच्चे नशीली चीज को सूंघकर नशा कर रहे थे।

संबंधित स्कूलों के शिक्षकों को सौंप दिए छात्र

इस बीच फिल्म रिलीज के सिलसिले में हाल पहुंचे उत्तराखंड फिल्म एसोसिएशन के अध्यक्ष एसपीएस नेगी ने इन बच्चों की हालत देखी तो तुरंत पुलिस को सूचना दी। बच्चों को रोक लिया गया।

धारा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद हॉल में दोबारा चेकिंग की गई तो 22 और छात्र क्लास बंक कर फिल्म देखते धरे गए।

हालांकि, इनमें से कोई भी नशा नहीं कर रहा था। यूनिफॉर्म और बस्तों की तलाशी से साफ हुआ कि ये सभी बच्चे श्री गुरु रामराय की बिंदाल, तालाब, रेसकोर्स, पटेलनगर और कालिदास रोड शाखाओं के छात्र थे।

सूचना पर बिंदाल से शिक्षक अमित पयाल, तनुज शर्मा और विनोद ध्यानी भी हाल में आ गए। बाद में अन्य स्कूलों के शिक्षक भी पहुंचे। पुलिस ने छात्रों को संबंधित स्कूलों के शिक्षकों को सौंप दिया। इससे पहले उन्हें नशा न करने और क्लास बंक न करने की कड़ी सीख दी गई।
विज्ञापन

अभिभावक रखें ध्यान

दून हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एनएस बिष्ट बताते हैं कि स्कूली बच्चों में सूंघने वाले पदार्थों के नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है। यह बिहेवरियल प्रॉब्लम है।

बिष्ट के मुताबिक जो बच्चे ऐसा नशा करते हैं, उनके व्यवहार से सब साफ हो जाता है। अभिभावक ध्यान दें तो पढ़ाई में बच्चे के इंटरेस्ट, स्कूल में परफॉर्मेंस, घर से बाहर रहने की अवधि, क्लास बंक करने की शिकायतों से कुछ गलत होने का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बताया कि नशा करने वाले बच्चे अकसर खोए से रहते हैं, जरा-जरा बात पर चिढ़ जाते हैं। ऐसे बच्चों को तुरंत डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिक के पास ले जाना चाहिए।

डॉ. बिष्ट बताते हैं कि सूंघने वाला नशा बेहद खतरनाक है। यह सांस के जरिये सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर उन्हें खत्म कर देता है। इसके अलावा इससे बच्चे का स्टेमना भी प्रभावित होता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें