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हौसले की उड़ान: गरीब परिवार का बेटा बनेगा सैन्य अधिकारी

Thu, 11 Jun 2015 02:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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आग में तपकर ही सोना कुंदन बनता है, यह बात उत्तराखंड के जनजाति क्षेत्र बाबर के होनहार बेटे राहुल शर्मा ने भी साबित की है। कूल्हा गांव से गरीबी की आग में तपकर निकला यह कुंदन अब भारतीय सेना की शान बनने जा रहा है। राहुल शनिवार को भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून से पासआउट होकर सैन्य अधिकारी बन जाएंगे।
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विपरीत हालातों से जूझकर सैन्य अधिकारी तक के सफर में कई मुश्किल राह आए। लेकिन किसी मोड़ पर हालात राहुल का हौसला नहीं तोड़ पाए। उनके गांव कूल्हा तक पहुंचने के लिए आज भी सड़क नहीं है।

पिता एक दुकान में काम करते हैं। माता-पिता के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे राहुल की फीस भर सकें। परिवार ने रिश्तेदारों और ब्याज पर कर्ज लेकर उसे पढ़ाया।
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बेटे को पढ़ाने के ल‌िए मां ने किए छोटे-मोटे काम

घर में गरीबी का आलम यह ता कि कई बार मां रोशनी को भी छोटे-मोटे काम करने पड़े। गरीबी के बीच पले-बढ़े राहुल की सुख सुविधाओं से दूरी ही रही। राहुल की जिंदगी में संसाधनों की कमी जरूर रही पर हौसले में कमी नहीं होने दी।

गांव के छोटे से स्कूल से नवोदय विद्यालय का सफर फिर नेशनल डिफेंस एकेडमी और आईएमए होते हुए राहुल शनिवार को अपनी मंजिल पर पहला कदम रखेंगे।

राहुल के पिता जगत राम शर्मा ने बेटे के लिए सपने तो बहुत देखे थे, लेकिन उन्हें अपनी किस्मत पर भरोसा नहीं था। राहुल ने मेहनत की स्याही से नई तकदीर लिख डाली। कल तक एक दुकान में काम करने वाले जगत राम अब एक सैन्य अधिकारी के पिता कहलाएंगे।
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आईआईटी छोड़ चुनी डिफेंस एकेडमी की राह

वर्ष 2010 में जब राहुल का नेशनल डिफेंस अकादमी खड़गवासला में चयन हुआ तो माता-पिता को लगा कि वह फौज में भर्ती हो गया। उसी समय राहुल ने आईआईटी की लिखित परीक्षा पास की थी।

जगत राम बताते हैं कि हमारे इलाके से सेना में कोई अफसर नहीं था, सो हमें लगा कि राहुल कोई और नौकरी करे। नाते-रिश्तेदार भी यही चाहते थे कि वह आईआईटी ज्वाइन करे, लेकिन राहुल ने एनडीए में जाने का फैसला लिया। जब एक बार माता-पिता एनडीए गए तो वह तब उन्हें अहसास हुआ कि राहुल ने ऐसा काम कर दिखाया है, जिसके बार में उन्होंने सोचा भी न था।

पिता को कंधे पर रैंक चढ़ाने का इंतजार
कुछ समय पहले ही परिवार ने विकासनगर में एक छोटा सा मकान किराये पर लिया है। राहुल की दो छोटी बहनें हैं, एक कॉलेज तो दूसरी स्कूल में पढ़ रही है। पिता जगत राम कहते हैं कि अब उन्हें 13 जून का इंतजार है, जब वे राहुल के कंधों पर अफसर का रैंक चढ़ाएंगे।
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