‘अब हाथ किसी के आगे मांगने के लिए नहीं फैलाना पड़ता। यह बढ़ता है तो दूसरों को देने के लिए।’ यह कहते हुए अमरवती की आंखों में गर्व की चमक साफ नजर आई।
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ऊधमसिंह नगर के सितारगंज निवासी अमरवती कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार की रोजी चलाने वाली इस महिला ने घास की टोकरी बनाने को स्वरोजगार के तौर पर अपनाया तो अपने साथ एक हजार महिलाओं की किस्मत बदलने का भी जरिया बन गई।
दर-दर भटकना पड़ता था
राजभवन में आयोजित वसंतोत्सव में पहुंची नकुलिया गांव की अमरवती ने बताया कि पहले काम की तलाश में दर-दर भटकना पड़ता था। मजदूरी मिल भी जाए तो मालिक की डांट सुननी पड़ती थी।
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घास की टोकरियां बनानी आती थीं तो वर्ष 2002 में इसे ही रोजगार बना लिया। बैंबू बोर्ड से मदद मिली तो नदियों के किनारे उगने वाली घास काट टोकरी बनाने के काम को व्यावसायिक रूप दे दिया। आज अपने हाथों की कला से उसने हजारों महिलाओं की तकदीर बदल दी है।
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अब दून से लेकर दिल्ली तक अमरवती की बनाई टोकरियां बिकती हैं। अमरवती ने अपने जैसी करीब 1000 महिलाओं को भी इस काम से जोड़ा। राणाधारू बांस एवं रेखा हस्तशिल्प उत्पाद विपणन सहकारिता के नाम से संस्था बनाई, जिसकी वह अध्यक्ष हैं।
वसंतोत्सव में कई प्रतियोगिताएं
राजभवन में फूलों की प्रदर्शनी के साथ ही कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। चित्रकला प्रतियोगिता में विभिन्न स्कूलों के आठ सौ से अधिक बच्चों ने प्रतिभाग किया। बच्चों ने फूलों से रंगोली भी बनाई।
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आईटीबीपी के जवानों ने जूडो कराटे का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया तो स्वामी नारायण वैदिक ऋषिकुल ऋषिकेश के छात्रों ने योग के गुर सिखाए। प्रदर्शनी में आईआईटी रुड़की, बीएचईएल सहित विभिन्न संस्थानों ने स्टॉल लगाए हैं।
आज भी खुली रहेगी प्रदर्शनी
राजभवन में आम जनता के लिए पुष्प प्रदर्शनी रविवार को भी सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक खुली रहेगी। इसके बाद पुरस्कार वितरण और लोककलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी।