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ज्ञान गोदड़ी जाने के लिए निकले जत्थे को कुल्हाल बार्डर पर रोका

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पंजाब से हरिद्वार जाने के लिए निकले सिख समुदाय के एक जत्थे को उत्तराखंड के कुल्हाल बॉर्डर पर रोक लिया गया। पुलिस के सामने नारेबाजी करते हुए जत्थे में शामिल लोगों ने गिरफ्तारी दी। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार करके ढालीपुर स्थित एक होटल में कई घंटों तक रखने के बाद उन्हें निजी मुचलकों पर रिहा करने के साथ वापस लौटा दिया।
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ऑल इंडिया सिख फेडरेशन के अध्यक्ष गुरचरण सिंह बब्बर के नेतृत्व में चल रही ज्ञान गोदड़ी यात्रा दोपहर लगभग एक बजे उत्तराखंड के कुल्हाल बॉर्डर पर पहुंची। यात्रा के आने की पूर्व सूचना के चलते बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल ने यात्रा में शामिल लोगों को यमुना नदी के पुल पर ही रोक लिया। इस दौरान जत्थे में शामिल लोग नारेबाजी करते हुए हरिद्वार जाने की जिद पर अड़े रहे। फेडरेशन के अध्यक्ष गुरचरण सिंह बब्बर ने कहा कि ज्ञान गोदड़ी गुरद्वारे की जमीन संगत को सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनके माध्यम से लगातार प्रदेश सरकार से बात की जाती रही है, लेकिन सरकार से उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगत शांतिपूर्ण ढंग से हरिद्वार जाकर गुरद्वारे की जमीन पर मत्था टेकना चाहती है, लेकिन सरकार हर साल उन्हें प्रदेश से बाहर ही रोक लेती है। इस दौरान जत्थे के आगे बढ़ने की जिद पर अड़े रहने के कारण प्रशासन के आदेश पर पुलिस ने जत्थे में शामिल 26 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उन्हें कई घंटे तक ढालीपुर स्थित एक होटल में रखने के बाद मुचलके की कार्रवाई करते हुए बॉर्डर के बाहर वापस लौटा दिया। जत्थे में सत्येंद्र सिंह, सुुभा सिंह, गुरप्रीत, जसमीत, गुरवंत सिंह, अवतार सिंह, चंचल सिंह, परमीत कौर, बलविंदर कौर, निर्मल सिंह, कुलप्रीत सिंह, जसबीर सिंह, कुलदीप सिंह, विधान सिंह शामिल रहे। इस अवसर पर उप जिलाधिकारी विनोद कुमार, एसपी देहात कमलेश उपाध्याय, सीओ प्रेमनगर दीपक कुमार, कोतवाली प्रभारी रविंद्र शाह, एसओ सहसपुर विनोद राणा, एसओ कालसी अशोक राठौड़ और कुल्हाल चौकी प्रभारी रजनीश सैनी मौजूद रहे।
यह है विवाद
बताया जाता है कि हरिद्वार में हर की पौड़ी के पास लंढौरा हाउस भवन हुआ करता था। वर्ष 1974 में कुंभ से पूर्व घाट की विस्तारीकरण योजना में यह भवन व इसके आसपास की अन्य इमारतें ढहा दी गई थीं। जिस स्थल की जत्था बात करता है, उस पर पुल बना हुआ है व पुल के नीचे एक स्काउट एंड गाइड कार्यालय भी स्थित है। जत्थे का दावा है कि उक्त स्थल पर गुरुनानक देव ने प्रवास किया था। इसके लिए उसे ज्ञान गोदड़ी के नाम से जाना जाता है। उनका कहना है कि उस भूखंड को सरकार संगत को सौंपे, जिससे वह वहां एक भव्य गुरद्वारा बना सकें। यह जत्था ज्ञान गोदड़ी यात्रा लेकर हर साल बैसाखी से एक दिन पूर्व हिमाचल के रास्ते उत्तराखंड में प्रवेश करने का प्रयास करता है।
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