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पैसा है नहीं, दिखा दिया छह हजार करोड़ रुपये का सपना

Sun, 07 May 2017 12:31 PM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
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trivendra singh rawat
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शासन स्तर लंबित सड़कों के प्रस्तावों से सरकार की पेशानी पर बल हैं। इसकी वजह बनी हैं पिछली सरकार में स्वीकृत हजारों सड़कें, जिन्हें बनाने के लिए राजकोष से 6264 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
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नई सरकार के गठन से पूर्व लोक निर्माण विभाग में 11343 प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके थे। चुनावी साल में बड़ी संख्या में सड़कों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें से 2056 सड़कों की डीपीआर तक तैयार कर दी गईं। इन सड़कों की दूसरे चरण की स्वीकृति के लिए 4930 करोड़ रुपये चाहिए।

मजेदार बात यह है कि जिस लोक निर्माण विभाग पर इन सड़कों के निर्माण का जिम्मा है, उसका सालाना बजट ही 1400 करोड़ रुपये का है। इस बजट से वह नई स्वीकृतियों पर काम करने के अलावा सड़कों के अनुरक्षण का कार्य करता है।
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पिछले तीन साल से उसके इस बजट में एक पाई की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में हजारों सड़कों के दिखाए गए सपने पर बजट की कमी का ग्रहण लगने के पूरे आसार हैं।
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टूट सकता है सड़कों का सपना

badrinath highway - फोटो : AmarUjala
जो लोग अपने गांवों में जल्द सड़क पहुंचने की राह देख रहे हैं, उनका यह सपना फिलहाल टूट सकता है। सरकार के पास बजट का अभाव है और अब उसने केवल उन्हीं प्रस्तावों पर काम करने का फैसला किया है, जो सर्वोच्च प्राथमिकता वाले हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत लोनिवि को प्रस्तावों के औचित्य का परीक्षण करने का पहले ही निर्देश दे चुके हैं।

75 फीसदी कार्य वाली सड़कें बनेंगी
लेकिन सरकार ने तय किया है कि जिन स्वीकृत सड़कों पर 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।  ऐसे 2961 कार्यों पर 75 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। 

नए प्रस्तावों पर सवाल
बहुत बड़ी संख्या में प्रस्तावित लंबित होने की वजह से अब नए प्रस्तावों को लेकर सवाल है। चुनाव जीतकर आए सत्तारुढ़ दल के माननीय भी सड़कों के नए प्रस्ताव देंगे। हालांकि सीएम ने माननीयों से सर्वोच्च प्राथमिकता वाले प्रस्ताव देने की सलाह दी है, मगर अपने-अपने क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा सड़कें मंजूर कराने के लिए माननीय शायद ही उनकी इस सलाह का ध्यान रखेंगे।

लोनिवि के प्रभारी सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी ने बताया कि शासन स्तर पर जितने भी प्रस्ताव लंबित हैं, उनकी समीक्षा की जा रही है। जिन सड़कों पर 75 फीसदी कार्य हो चुका है, माननीय मुख्यमंत्री ने उनमें से उन कार्यों को इसी वित्तीय वर्ष में पूरा करने के निर्देश दिए हैं जिन पर काफी कम काम शेष है।
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