ग्रामीण पेयजल सेवाओं के सतत संचालन एवं रखरखाव पर मंत्री स्तरीय नीतिगत संवाद कार्यशाला का हुआ आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तराखंड में जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2025-26 में जल गुणवत्ता परीक्षण का लक्ष्य शत-प्रतिशत प्राप्त कर लिया गया है। ग्रामीण पेयजल योजना की संरचना एवं रखरखाव नीति में केंद्र सरकार की ओर से दिए गए सुझाव को सम्मिलित करते हुए विस्तृत नीति बनाई गई है। यह बात सिंचाई एवं जलागम मंत्री सतपाल महाराज ने नई दिल्ली स्थित डॉ. सी. सुब्रमण्यम कन्वेंशन सेंटर, जल शक्ति मंत्रालय में मंगलवार को ग्रामीण पेयजल सेवाओं के सतत संचालन एवं रखरखाव पर मंत्री स्तरीय नीतिगत संवाद कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा कि योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव का कार्य स्वयं सहायता समूह से कराए जाने के लिए संचालन व रखरखाव नीति में शामिल किया गया है।
प्रशिक्षण अवधि के लिए पारिश्रमिक दिया जाए
सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से कहा कि लगभग 7800 ग्राम पंचायत में नल जल मित्र रखे जाने हैं। जिनमें 6800 नल जल मित्रों का चयन कर लिया गया है जिनको 42 दिनों का प्रशिक्षण दिया जाना है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के लिए नल जल मित्र इच्छुक नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि वह अपने रोजगार को छोड़कर 42 दिन का समय नहीं दे पा रहे हैं इसलिए इन्हें मनरेगा की भांति प्रशिक्षण पर 42 दिन का पारिश्रमिक दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में राज्य सरकार पर लगभग 1500 करोड़ की देनदारी शेष है एवं 1096 योजनाओं का कार्य धीमी गति से चल रहा है इसलिए कार्य को गति प्रदान करने हेतु आवश्यक धनराशि मुक्ति की जाए।