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उत्तरकाशी में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान क्षतिग्रस्त एफआरआई भवन की मरम्मत में जुटे सीबीआरआई, सीपीडब्ल्यूडी के विशेषज्ञ

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उत्तरकाशी में साल 1999 में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के सभागार समेत मुख्य भवन में दो दर्जन से अधिक स्थानों पर आयी दरारों की मरम्मत शुरू की गई है।
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केंद्रीय वन अनुसंधान संस्थान रुड़की (सीबीआरआई) के विशेषज्ञों की देखरेख में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों द्वारा मरम्मत की जा रही है। उल्लेखनीय पहलू यह है कि वन अनुसंधान संस्थान के इंजीनियरों ने पहले अपने स्तर पर इसकी मरम्मत की कोशिश की, लेकिन जब वे दरारों की मरम्मत नहीं कर पाए तो सीबीआरआई के विशेषज्ञों की मदद ली गई। वन अनुसंधान संस्थान के इंजीनियरिंग सेल के प्रमुख आरएस तोपवाल ने बताया कि सीबीआरआई के विशेषज्ञों की टीम ने दरारों का तकनीकी अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से मरम्मत के लिए बजट जारी किया गया। बताया कि सीबीआरआई विशेषज्ञों की देखरेख में मरम्मत का काम शुरू किया गया है और जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा।
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सूरज की गर्मी से पकाई ईटों से हुआ था निर्माण
वन अनुसंधान संस्थान का मुख्य भवन वास्तुकला के लिहाज से दुनिया के चुनिंदा भवनों में से एक है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में एफआरआई के मुख्य भवन को विशुद्ध रूप से सूर्य की गर्मी से पकायी गई ईटों से बना दुनिया का उत्कृष्ट निर्माण बताया है। दो हजार एकड़ में फैले एफआरआई के निर्माण पर उस समय नब्बे लाख रुपये खर्च किए गए और सात साल में इसका निर्माण पूरा किया गया। सात नवंबर 1929 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने एफआरआई भवन का उद्घाटन किया था। एफआरआई के निर्माण में ग्रीक- रोमन शैली की वास्तुकाला का इस्तेमाल किया गया। संस्थान के मुख्य भवन का डिजाइन महान वास्तुकार बिलियन लुटियंस ने तैयार किया था। एफआरआई को पहले इंपीरियल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट एंड कॉलेज के नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में इसे वन अनुसंधान संस्थान का दर्जा दिया गया। उल्लेखनीय पहलू यह है कि महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस ने आठ साल तक वन अनुसंधान संस्थान में अपनी सेवाएं दी थी।
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