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भगवान को बचाने के लिए सेना से भिड़ी महिलाएं

Thu, 24 Oct 2013 11:18 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी देहरादून में महिलाएं मंदिर गिराने का विरोध कर बुलडोजर के आगे बैठ गईं। बुधवार को सैन्य भूमि पर निर्माणाधीन मंदिर को गिराने पहुंची सेना को जनता का भारी विरोध झेलना पड़ा। जनविरोध के चलते सेना को बैरंग लौटना पड़ा।
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भाजपा विधायक गणेश जोशी और एडीएम हरक सिंह रावत ने सैन्य अधिकारियों से बातचीत की, जिसके बाद कार्रवाई को टाल दिया गया। हालांकि सेना कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अवैध निर्माण हटाने पर अड़ी है।

खस्ताहाल स्थिति के चलते नया निर्माण किया
गढ़ी कैंट के बनिया बाजार क्षेत्र में स्थानीय लोगों ने बरसों पुराने मंदिर के बदले एक माह पहले नए भवन का निर्माण शुरू किया। जनता का दावा है कि कई दशकों से मंदिर स्थापित है लेकिन भवन की खस्ताहाल स्थिति के चलते नया निर्माण किया जा रहा है।
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सेना का दावा है कि ए -1 श्रेणी की भूमि पर होने वाला निर्माण अवैध है, जिसे गिराने का अधिकार उसे है। एक दिन पहले सैन्य अधिकारियों ने निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया। सब एरिया ने भवन को अवैध निर्माण की श्रेणी में डाल कर गिराने के निर्देश दिए।

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बुधवार सुबह से ही सेना ने कई बार क्षेत्र का निरीक्षण किया और लोगों को निर्माण रोकने के आदेश दिए। शाम को सेना के एडम कमांडेंट सहित सैनिक जेसीबी लेकर पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने भाजपा विधायक गणेश जोशी को बुला लिया। लोगों के विरोध को देखते हुए सेना को लौटना पड़ा।

अंग्रेजों के जमाने से चढ़ता है झंडा
स्थानीय लोगों ने बताया कि जिस क्षेत्र में पहले मंदिर था उसी स्थान पर दोबारा से निर्माण किया गया है। बताया कि एक पुराना हनुमान मंदिर ऐसा है जहां ब्रिटिश समय से झंडा चढ़ता है। उस जमाने में जब दशहरे पर झंडा चढ़ता था तो सेना बंदूकों से सलामी देती थी।

पहले नोटिस जारी करो
सेना की कार्रवाई के संबंध में गुरुवार को डीएम से विधायक गणेश जोशी और स्थानीय जन प्रतिनिधिमंडल मिलेगा। जोशी ने बताया कि मंदिर अगर सैन्य भूमि पर है तो सेना पहले नोटिस जारी कर पक्ष जाने। पुराने मंदिर के ढांचे पर नया मंदिर भवन बनाया गया है। इसे अवैध नहीं कहा जा सकता।

जनता त्रस्त है सैन्य फरमानों से
बनिया बजार क्षेत्र में कई दशकों से दो दर्जन परिवार रहते हैं। अमर उजाला ने लगातार बनिया बाजार में सड़क मार्ग बाधित करने के मामले को उठाया है।

बनिया बाजार की दशकों पुरानी एक सड़क के बीचोंबीच दीवार खड़ी कर उसे बंद कर दिया गया है। कमान मुख्यालय के आदेशों की अनदेखी कर आवाजाही के मार्गों पर आए दिन सेना रोक-टोक करती है। इससे क्षेत्र की जनता काफी परेशान है।
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