बुधवार को देहरादून में आयोजित हो रहे विरासत में वडाली बंधुओं ने अपने सूफी अंदाज का जादू बिखेरा। तालियों की गड़गड़ाहट, तबले की थाप और हारमोनियम की सुरीली धुनों के बीच वडाली बंधुओं की दिलकश आवाज से अंबेडकर स्टेडियम गूंज उठा।
वडाली बंधुओं को सुनने के लिए रात आठ बजे से ही लोग जुटने शुरू हो गए थे।
तालियों से इस्तकबाल
दोनों भाई रात साढ़े नौ बजे मंच पर आए। लोगों ने तालियों से दोनों का इस्तकबाल किया। या मोहम्मद लोग कहेंगे... से शुरुआत के बाद वडाली बंधुओं ने फिर दाता के गुलामों को... की प्रस्तुति दी।
शायरी के साथ वडाली बंधुओं ने अपने प्रसिद्ध गीत तू माने या ना माने दिलदारा... का गायन शुरू किया तो श्रोता झूम उठे।
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मेरा पिया घर आया..., मन रे जाग... आदि गीतों से दोनों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। इससे पूर्व सुबह क्राफ्ट विलेज खुलने के साथ विरासत की शुरुआत हुई।
दोपहर में विरासत साधना का आयोजन हुआ और शाम का आगाज गढ़वाल यूनेस्को विश्व धरोहर रम्माण से हुआ। इसके बाद पं. रोनू मजूमदार की बांसुरी वादन और मैसूर मजूमदार की वायलिन वादन की जुगलबंदी हुई।
भीड़ के आगे इंतजाम बेकार
वडाली बंधुओं के आगमन पर जुटी भीड़ ने विरासत की व्यवस्था को पटरी से उतार दिया। खुले पंडाल में वडाली बंधुओं को देखने और सुनने के लिए लोगों में कुर्सियों की जंग दिखी। जिसे कुर्सी नहीं मिली वो पंडाल की गैलरी में ही खड़ा हो गया, जिससे उनकी आयोजकों से भी झड़प हुई।
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हालांकि, भीड़ बढ़ने पर आयोजकों ने भी हथियार डाल दिए। आलम यह रहा कि इतने बड़े आयोजन के बावजूद स्टेडियम में कहीं प्रोजेक्टर नहीं लगाया गया था। इससे दर्शकों को खासी जद्दोजहद करनी पड़ी।
ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त, लगा जाम
बुधवार को कौलागढ़ रोड पर ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई। वडाली बंधुओं का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अंबेडकर स्टेडियम की पार्किंग से एक साथ सैकड़ों वाहनों के निकलने से सड़क पर जाम लगा।
इस दौरान सड़क पर आड़ी-तिरछी गाड़ियों के कारण स्थिति बदतर हो गई। पुलिसकर्मियों को जाम खुलवाने में एक घंटे का वक्त लग गया।
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