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कारगिल युद्धः उत्तराखंड के ये जाबांज बने नायक

Sat, 26 Jul 2014 09:10 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
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कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के वीरों ने अपने सहास की जो इबारत लिखी वो भारतीय सैन्य इतिहास का हिस्सा बनकर भविष्य में युवाओं को राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देती रहेगी।
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कारगिल में टोलोलिंग पर्वत चोटी से लेकर द्रास सेक्टर की चोटियां दुश्मन से खाली करवा कब्जा करने में राज्य के कई सपूतों ने प्राण न्यौछावर किये। उन्होंने जो वीरता की गाथा लिखी उसके लिए कारगिल युद्ध के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज किया गया है।

टोलोलिंग के नायक मेजर गुप्ता
2 राजपूताना राइफल के मेजर विवेक गुप्ता के नेतृत्व में 12 जून की रात को टोलोलिंग चोटी को फतेह के लिए कंपनी रवाना हुई।

ऊंचाई पर बैठे दुश्मन ने हमला किया, जिसमें मेजर गुप्ता को दो गोलियां लगी, लेकिन घायल हालत में मेजर गुप्ता ने तीन दुश्मनों को ढेर कर बंकर पर कब्जा किया। मेजर गुप्ता को मरणोंपरांत युद्ध में दूसरा सर्वश्रेष्ठ वीरता पदक महावीर चक्र से अलंकृत किया गया।
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प्वाइंट 4590 पर किया कब्जा
18 ग्रिनेडियर के मेजर राजेश सिंह अधिकारी ने टोलोलिंग पर 30 मई को अपनी कंपनी के साथ चढ़ाई शुरू की। 15 हजार फुट की ऊंचाई पर भारी बर्फ के बीच दुश्मन ने मशीन गन से उनपर धावा बोला।

गंभीर रूप से जख्मी हालत में दो बंकर ध्वस्त कर मेजर अधिकारी ने प्वाइंट 4590 पर कब्जा किया। मेजर अधिकारी के इस वीरता और बलिदान के लिए उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

पैरा कमांडो ब्रिज ने 5 दुश्मन मार गिराये
स्पेशल फोर्सेज 9 पैरा के नायक ब्रिजमोहन सिंह की अगुवाई में चार्ली टीम ने कारगिल के मशकोह सब सेक्टर में 1 जुलाई को हमला बोला।

बेहतरीन पर्वतरोही नायक ब्रिज ने ऊंचे बंकर पर चढ़े और दो दुश्मनों को हाथ से हाथ की लड़ाई में मार गिराया। इन्हें मरणोंपरात वीरता चक्र से सम्मानित किया गया।

प्वाइंट 4700 पर गढ़वाल राइफल का दम
द्रास सेक्टर के प्वाइंट 4700 पर सर्वाधिक सैनिक शहीद हुए। 2 राजपूताना राइफल और 18 गढ़वाल राइफल के रणबांकुरों ने 30 जून की रात को चोटी पर हमला बोला। 18 गढ़वाल के नायक कश्मीर सिंह, राइफलमैन अनसूया प्रसाद और कुलदीप सिंह दल का हिस्सा थे।

तीनों वीरों ने घायल होने बावजूद दर्जन भर दुश्मनों को मार गिराया। इस युद्ध में हाथ से हाथ की लड़ाई में कश्मीर, अनसूया और कुलदीप ने अदम्य सहास दिखाया जिसके लिए उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस युद्ध में लांस नाइक देवेंद्र सिंह को सेना मेडल मिला।

नागा रजिमेंट का टूईन बम्प पर फतह
6 और 7 जुलाई को कारगिल में टूईन बम्प पर 2 नागा रेजिमेंट के सिपाही कैलाश कुमार, सिपाही राजेश गुरुंग, सिपाही संजय गुरुंग, नायक देवेंद्र सिंह ने चढ़ाई के दौरान दु्श्मन की आर्टिलरी बमवारी के बीच बम्प फतह करने में प्राण न्यौछावर किए। नायक देवेंद्र को वीरता के लिए मेंशन इन डिस्पैच से अलंकृत किया गया।
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