वर्ष का पहला पूर्ण सूर्यग्रहण इस बार नौ मार्च को लगने जा रहा है। लेकिन इसे लेकर वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों में मतभेद है।
भारत के लिए इसकी वैज्ञानिक उपयोगिता नहीं है, क्योंकि इसका अधिकांश भाग प्रशांत महासागर में ही पडे़गा। जबकि देहरादून के कुछ ज्योतिषियों का कहना है कि सूर्यग्रहण भारत में भी दिखेगा।
उनका कहना है कि हालांकि यह देश के उत्तर पश्चिमी भागों में नहीं दिखाई देगा। ग्रहण का स्पर्श नौ मार्च को प्रात: 5 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगा।
ज्योतिषी गणना के अनुसार दून में आठ मिनट के लिए सूर्यग्रहण दिखाई देगा। नैनीताल स्थित आर्यभट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान एरीज आमतौर पर सूर्य संबंधी गणनाओं में विशेष योग्यता और रुचि रखता है, लेकिन ग्रहण भारत से न दिखने के कारण संस्थान इसका अध्ययन नहीं कर पाएगा।
संस्थान के निदेशक एवं वैज्ञानिक डॉ. बहाबुद्दीन ने बताया कि ग्रहण भारत में सूर्योदय से पहले लग जाएगा इस कारण इसका प्रभाव यहां नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि पूर्ण सूर्यग्रहण इंडोनेशिया, सुमात्रा, सुलावेसी, उत्तर पूर्वी आस्ट्रेलिया से दिखाई देगा।
इसके अलावा इसका अधिकांश भाग प्रशांत महासागर से ही दिखेगा। डॉ. बहाबुद्दीन ने बताया कि ग्रहण भारतीय समयानुसार प्रात: 4 बजकर 48 मिनट पर प्रारंभ होगा।
5 बजकर 45 मिनट पर यह पूर्णता पर पहुंचेगा। इसकी पूर्णता की अवधि 4 मिनट 9 सेकंड की होगी। यह सूर्य के मार्ग से 155 किमी की पट्टी में दिखाई देगा। अगला पूर्ण सूर्यग्रहण 21 अगस्त 2017 को लगेगा जो विशेष कर दक्षिणी गोलार्द्ध में अमेरिका से दिखाई देगा।
उधर, दून के ज्योतिषियों का कहना है कि सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पूर्व यानी आठ मार्च को शाम 5 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगा। चूंकि यहां सूर्योदय से पहले सूर्य ग्रहण हो जाएगा।
ऐसे में यहां ग्रहण का स्पर्श नहीं देखा जा सकेगा। केवल ग्रहण का मोक्ष देखा जा सकेगा। नौ मार्च को सूर्योदय प्रात: 6.35 बजे होगा। देश में प्रात:काल यह ग्रहण खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा।
देहरादून में ग्रहण प्रात: 6.35 से 6.43 बजे तक यानी कुल आठ मिनट की अवधि तक रहेगा।
कुंभ राशि पर बन रहा पंचग्रही योग
उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार यह ग्रहण पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र एवं कुंभ राशिस्थ चंद्र के समय घटित होगा। ग्रहण सीमांत पर्वतीय एवं पश्चिमी भूभाग में रहने वाले लोगों एवं राजनीतिज्ञों के लिए कष्टप्रद है।
ग्रह स्थिति
डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार सूर्य ग्रहण के समय सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र एवं केतु (पंचग्रह) कुंभ राशि पर एकत्र हैं। इन पर शनियुत मंगल की दृष्टि भी है। अत: जीवन उपयोगी वस्तुएं महंगी होंगी। शासन सत्ता में परिवर्तन, अकाल की स्थिति के आसार, प्रधान नेताओं के लिए कष्टप्रद संकेत हैं।