सस्पेंड चल रहे समाज कल्याण अधिकारी एनके शर्मा को 18 साल पहले की गई गलती की सजा अब मिली। उत्तराखंड शासन ने शर्मा के आचरण की घोर निंदा करते हुए दो वार्षिक वेतन वृद्धियों पर स्थाई रोक दी है।
समाज कल्याण अधिकारी के पद पर थे तैनात
शर्मा 1996-97 में बुलंदशहर में समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात थे। शासन ने विभाग के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करने के आरोप में दो महीने पहले शर्मा को सस्पेंड कर सीडीओ पिथौरागढ़ कार्यालय से संबद्ध कर रखा है। सस्पेंड होने के समय वह पिथौरागढ़ के ही समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात थे।
शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने बुलंदशहर में तैनाती के दौरान स्वच्छकार विमुक्ति योजना के अंतर्गत 2075 स्वच्छकारों को प्रशिक्षण दिए जाने के लिए यूपी अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम द्वारा दी गई धनराशि 41.50 लाख रुपए का प्रयोग नहीं किया और उक्त धनराशि को पीएलए में रखे जाने और आहरण वितरण अधिकारी के कर्तव्यों एवं दायित्वों का उचित पालन नहीं किए जाने का दोषी पाया गया।
2004 में एनके शर्मा यूपी से उत्तराखंड आ गए और इसकेबाद यूपी ने उत्तराखंड शासन को जांच रिपोर्ट आदि तथ्य भेजकर दंडित किए जाने की सिफारिश की। लेकिन तब से मामला अब तक लटका रहा। करीब चार महीने पहले शर्मा को सस्पेंड कर दिया गया और जून में राज्य लोक सेवा आयोग ने भी शर्मा को दिए जाने वाले दंड पर अपनी सहमति दे दी।
मगर, जून के बाद भी मामला लटका रहा। अब समाज कल्याण आयुक्त व अपर मुख्य सचिव एस राजू ने विगत 22 सितम्बर को जारी आदेश में दोषी अफसर के आचरण की घोर निंदा करने और दो वार्षिक वेतन वृद्धि स्थाई रूप से रोकने का दंड जारी किया।
क्या फर्क पड़ेगा
कार्मिक विभाग के नियमों के मुताबिक किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को जांच के बाद यदि स्थाई रूप से वेतन वृद्धि रोकने या आचरण की घोर निंदा करने का दंड दिया जाता है उक्त कार्मिक अगले पांच साल तक पदोन्नति पाने का हकदार नहीं होगा।