भूकंप की तीव्रता 6 से अधिक हो तो विनाश
जैसे-जैसे मैग्नीट्यूड का अंक बढ़ता जाता है, उसी अनुपात में धरती से निकलने की ऊर्जा की मात्रा बढ़ती जाती है। प्रो. सिंह का कहना है कि धरती के नीचे हो रही भूगर्भीय हलचल में भूकंप का आना तब तक एक सामान्य प्राकृतिक घटना की ही तरह है, जब तक कि उससे जानमाल की कोई हानि न हो। जब भूकंप की तीव्रता 6 से अधिक हो जाती है तो यह विनाश करने लगता है। वहीं दूसरी ओर, उत्तराखंड में 1991 में उत्तरकाशी में 6.6 तीव्रता के भूकंप के बाद कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। हालांकि खरसाली में 2007 में भूकंप की तीव्रता 5 थी। ऐसे में वैज्ञानिक सेस्मिक गैप के तौर पर भी बड़े भूकंप की आशंका जता रहे हैं।
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धरती के भीतर बढ़ती गतिविधियां चिंता का कारण
वाडिया इंस्टीट्यूट देहरादून के वैज्ञानिक डाॅ. नरेश कुमार का कहना है कि भले ही छोटे भूकंप का बड़े भूकंप से संबंध न हो लेकिन इस तरह छोटी गतिविधि भी चिंता का कारण है। ऐसे में आपदा पूर्व के कदम उठाए जाने जरूरी हैंं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में लंबे समय से बड़ा भूकंप नहीं आया है, जोन पांच में आने वाले हिमालयी राज्य में सेस्मिक गैप के कारण के भी सावधानी बरते जाने की जरूरत है।