देहरादून। उत्तराखंड भर में सैकड़ों लोगों ने हिंसक और नफरत वाली राजनीति के खिलाफ आवाज उठायी। ‘नफरत नहीं, रोजगार दो’... नारे के साथ महामारी और आचार संहिता को ध्यान में रखते हुए लोगों ने अपने घर में ही या छोटा छोटा समूह में धरना दिया। कनस्तर बजा कर कहा की कनस्तर बजाओ, हिंसा भगाओ!
उत्तराखंड के प्रमुख जन संगठन और कुछ राजनेताओं के आवाहन पर देहरादून, टिहरी, रामनगर, हरिद्वार, चमोली, नैनीताल, श्रीनगर, बागेश्वर, ऊधम सिंह नगर और अन्य जगहों में लोग कार्यक्रम में शामिल हुए थे। सेवानिवृत्त सरकारी अफसर, महिला आंदोलनकारी, वरिष्ठ रंगकर्मी और पत्रकार, वरिष्ठ राजनेता और सैकड़ों आम लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।
लोगों ने कहा कि पिछले साल ‘धर्म संसद’ में नफरत भरा भाषण दिया गया था। उससे पहले भी कई बार 2017 और 2018 में, और हाल में रुड़की और नैनीताल में हिंसक घटनाएं हुई हैं। इन हिंसक संगठनों और आयोजकों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं दिखी। अभी उच्चतम न्यायालय के नोटिस के बाद दो ही व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
ये रहीं मांगें
-भीड़ की हिंसा और नफरत की राजनीति फैलाने वाले तत्वों पर आपराधिक मुकदमे चलाकर उनको गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाए।
-मजदूरों और युवाओं के लिए बनाया हुआ कल्याणकारी और रोजगार के योजनाओं को पूरी तरह से अमल करें। महामारी से बढ़ती हुई बेरोजगारी पर केंद्र सरकार तुरंत कदम उठाए।
- स्वास्थ्य के लिए सरकार तुरंत हेल्पलाइन शुरू करे। ताकि लोगों को ऑक्सीजन, बेड और आईसीयू के बारे में जानकारी एक ही फ़ोन कॉल में मिल जाए।
- उच्चतम न्यायालय के जुलाई 2018 का भीड़ की हिंसा पर दिए गए फैसले के सारे निर्देशों को राज्य में तुरंत अमल में लाया जाए।