बर्फ पर स्कीइंग के दौरान उत्तराखंड के खिलाड़ी अब घुमावदार मोड़ भी तेजी से पार कर सकेंगे।
न तो उन्हें स्पीड कम करनी होगी, न कोई झटका झेलना होगा। कोच अजय भट्ट के नेतृत्व में दक्षिण कोरिया में स्कीइंग की खास तकनीक कार्विंग टर्न सीखकर भारतीय टीम लौट आई है।
कोरिया में गोल्ड मेडल भी हासिल किया
खास बात यह है कि टीम में शामिल तीनों खिलाड़ी और कोच उत्तराखंड के हैं, जिन्होंने कोरिया में गोल्ड मेडल भी हासिल किया। दक्षिण कोरिया के प्योंग चेंग में 12 से 25 जनवरी तक आयोजित ड्रीम प्रोजेक्ट 2014 में प्रशिक्षण लेकर टीम सोमवार को दून लौटी।
कोच अजय भट्ट ने बताया कि प्रोजेक्ट में दक्षिण कोरिया समेत 39 देशों की टीमें आई थीं। बताया कि प्रशिक्षण में स्कीइंग के तीनों प्रारूप एल्पाइन, स्नो बोर्डिंग और आइस स्केट की नई तकनीक के बारे में बताया गया। इनमें सबसे अहम था कार्विंग टर्न।
इस तकनीक का प्रयोग अब तक भारत में नहीं किया गया है। बताया कि इसमें स्कीयर दोनों सकी के सहारे आसानी से मुड़ सकता है।
हर टर्न के बाद स्पीड बढ़ती जाती है। बताया कि टीम को स्नो स्कूटर, लूज स्लेज राइड, स्की जंप, बेथलॉन, एटीवी मशीन का प्रशिक्षण भी दिया गया।
मैत्री मैचों के साथ ताइक्वांडो ट्रेनिंग भी खिलाड़ियों ने ली। इस दौरान विभिन्न स्पर्धाओं में प्रदेश की टीम ने गोल्ड जीते।
2018 में होना है स्की ओलंपिक
दक्षिण कोरिया के सियोल सिटी में वर्ष 2018 में स्की ओलंपिक का आयोजन किया जाना है। अजय ने बताया कि भारतीय टीम इसमें प्रतिभाग के लिए बेहतर तैयारी करेगी। बताया कि दक्षिण कोरिया में खिलाड़ियों को आधुनिक तकनीक और संसाधन उपलब्ध है, लिहाजा उसकी तैयारी कहीं आगे है।
साथ चलती है रेस्क्यू टीम
कोच अजय भट्ट ने बताया कि स्कीइंग के दौरान भारत में स्कीयर के साथ रेस्क्यू टीम नहीं रहती। लेकिन दक्षिण कोरिया में प्रशिक्षण के दौरान सबसे आगे ट्रेनर चलते हैं, जबकि सबसे पीछे पेट्रोल पार्टी।
स्कीइंग के दौरान कोई खिलाड़ी चोटिल हो जाए तो पार्टी तुरंत राहत देती है। स्कीइंग के बाद कोरिया में हर शाम कोचों की मीटिंग होती है, जिसमें नई तकनीकों, उपकरणों की जानकारी दी जाती है।
रात को भी स्कीइंग
कोच ने बताया कि दक्षिण कोरिया में खिलाड़ी रात को भी स्कीइंग करते हैं। वहां खिलाड़ियों का शाम का सेशन पांच बजे से शुरू होता है जो रात 11 बजे तक चलता है। सुबह 08:30 बजे से दोपहर तक स्कीइंग की जाती है।
बताया कि भारतीय टीम को रात को स्कीइंग नहीं कराई गई, लेकिन कोरिया के खिलाड़ियों का प्रशिक्षण देखने का मौका मिला। रात को बर्फ के स्लोप बदल जाते हैं। बर्फ सख्त हो जाती है, जिससे खिलाड़ियों को खराब हालात से जूझने का अभ्यास होता है।
अभिषेक को मिली शाबाशी
जोशीमठ के समीप मारवाड़ी गांव के अभिषेक भट्ट ने कोरिया में सबसे कठिन स्लोप पर स्लाइड की। कोच अजय भट्ट ने बताया कि अभिषेक ने ट्रेनर की स्पीड के बराबर ही स्पीड रखी, जिस पर बाद में ट्रेनर ने उसे शाबाशी भी दी।
13 साल के अभिषेक ने बताया कि तीन साल पहले एक नेशनल चैंपियनशिप देख उनमें स्कीइंग का जज्बा जगा। वह सब जूनियर नेशनल स्कीइंग में दो रजत पदक जीत चुके हैं। बताया कि ताइक्वांडो के दौरान ट्रेनर ने लकड़ी की प्लेट तोड़ने का चैलेंज दिया।
अभिषेक ने यह प्लेट तोड़कर इनाम जीता। अभिषेक का कहना है कि दक्षिण कोरिया की तरह सुविधाएं भारत में भी मिलें तो यहां के खिलाड़ी किसी से कम नहीं।
बड़े भाई ने दी प्रेरणा
मारवाड़ी गांव के विकास भट्ट कोच अजय भट्ट के भाई हैं। आदर्श विद्या मंदिर जोशीमठ में दसवीं के छात्र विकास ने बताया कि औली में बर्फ गिरते ही भाई अजय स्कीइंग के लिए निकल जाते थे। उन्हें देख विकास ने भी 11 साल की उम्र में पहली बार स्कीइंग की।
पिता विनोद प्रसाद गढ़वाल मंडल विकास निगम में कार्यरत हैं, लिहाजा स्की आसानी से मिल गई। बताया कि कोरिया में उन्होंने एजिंग, टर्निंग, डाउनिंग पोजीशन का प्रशिक्षण लिया।
मां ने सिखाई स्कीइंग
सेंट जोजेफ्स एकेडमी देहरादून में आठवीं के छात्र देवसूर्य की स्कीइंग की शुरुआत 10 साल की उम्र से हुई है। देव ने स्कीइंग का गुर अपनी मां से सीखा। देव ने बताया कि उनकी मां तीन बार नेशनल स्कीइंग में मेडल जीत चुकी हैं।
देवसूर्य भी एक नेशनल टूर्नामेंट खेल चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह छुट्टियों में ही स्कीइंग कर पाते हैं, वह भी तब जब बर्फ पड़ती है। इसके लिए उन्हें दून से औली जाना पड़ता है। देव ने बताया कि कोरिया में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।