उत्तराखंड सरकार ने सचिवालय संघ की मांग पर पुनर्विचार नहीं किया और पांच से बढ़ाकर छह कार्य दिवस की व्यवस्था का आदेश जारी कर दिया है।
अब प्रात: दस बजे से शाम पांच बजे तक ऑफिस
लेकिन इस नई व्यवस्था में सचिवालय में काम करने वालों को हर लोकल छुट्टी भी मिलेगी। सचिवालय का समय भी बदल दिया गया है। पहले सचिवालय में काम काज का समय प्रात: साढ़े नौ बजे से शाम छह बजे तक था लेकिन अब प्रात: दस बजे से शाम पांच बजे तक रहेगा।
सचिवालय प्रशासन विभाग के सचिव पीएस जंगपांगी ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि सरकार ने सचिवालय में छह कार्य दिवस करने का निर्णय लिया है। इस आशय का शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। अभी तक यहां पांच कार्य दिवस होते थे।
उन्होंने बताया कि सचिवालय में कामकाज का समय भी कम कर दिया गया। अब सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक काम होगा। डेढ़ बजे से दो बजे तक लंच का समय तय है।
द्वितीय शनिवार को अवकाश रहेगा और स्थानीय अवकाश जो कि अभी तक सचिवालय कर्मियों के लिए नहीं थे, वो अब मिलेंगे। स्थानीय अवकाश जिलाधिकारी तय करते है और साल में इनकी संख्या छह होती है।
हालांकि जारी आदेश में इस बात का उल्लेख तो नहीं है लेकिन सचिवालय प्रशासन के सचिव ने दावा किया कि उच्च न्यायालय को छोड़कर राज्य के अधीन सभी तरह के कार्यालयों, आयोग केकार्यलयों में भी छह कार्य दिवस होंगे।
अभी तक यहां भी पांच कार्य दिवस होते थे। उन्होंने कहा कि यह आदेश सभी उन कार्यालयों पर लागू होगा जहां सचिवालय को आधार बनाकर पांच दिन का सप्ताह लागू था।
सचिव जंगपांगी ने बताया कि सोमवार को अवकाश है लेकिन विधानसभा का सत्र होने के कारण सचिवालय खुलेगा और कामकाज होगा। इस अवकाश के बदले सचिवालय कर्मियों को एक अतिरिक्त अवकाश दिया जाएगा जो कि 31 मार्च तक लिया जा सकेगा।
सरकार के फैसले का स्वागत है, हम न्यायिक लड़ाई लड़ेंगे और वर्क टू रूल काम करेंगे। पांच बजे के बाद कोई काम नहीं होगा। यदि छुट्टी के दिन बुलाना है तो कंपनसेट किया जाए। ताजा आदेश के परिपेक्ष्य में ही शनिवार को संघ की कार्य कारिणी की बैठक बुलाई गई है, ताकि आगे की रणनीति को अंजाम दिया जा सके।
- प्रदीप पपनै, महामंत्री, सचिवालय संघ
शासनादेश के साथ ही दिखा असर
जैसे ही छह कार्य दिवस केशासनादेश जारी होने की सूचना मिली तो सचिवालय कर्मियों की एकजुटता पहले ही दिन नजर आई। सत्तर प्रतिशत से ज्यादा अनुभाग और अफसरों के दफ्तर ठीक पांच बजे बंद हो गए।