उत्तराखंड में उद्योगों को बिजली का ‘करंट’ लगना शुरू हो गया है। उत्पादन के मुकाबले बुधवार को अचानक आपूर्ति बढ़ने से शाम तीन बजे से एक घंटे के लिए सिडकुल हरिद्वार और सिडकुल पंतनगर में बिजली कटौती की गई।
कटौती की वजह से परेशानी
जानकारों की मानें तो उद्योगों को एक घंटे की बिजली मुहैया न होने का मतलब है 15 से 20 करोड़ रुपए पर ‘बिजली’।
खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक, प्लास्टिक प्रोसेसिंग, स्टील समेत कई औद्योगिक इकाईयों बिजली कटौती की वजह से परेशानी का सामना कर रही हैं।
यूपीसीएल ने कटौती कम करने के उद्देश्य से हालांकि बृहस्पतिवार के लिए दो मिलियन यूनिट बिजली खरीद की बात कही है। बता दें कि मनेरीभाली द्वितीय और कालागढ़ जलविद्युत गृह से उत्पादन न होने की वजह से आपूर्ति कम हो रही है।
एक घंटे का मतलब तीन घंटे का नुकसान
कई ऐसे उद्योग हैं, जिनके लिए एक घंटे की कटौती का मतलब तीन घंटे का नुकसान है। मसलन प्रोसेसिंग प्लांट।
कट के बाद प्लांट कूलिंग करता है, इसके बाद जब बिजली आती है तो उसे हीटिंग में इससे ज्यादा समय लगता है।
एक्सपोर्ट यूनिट्स पर और असर
स्थानीय इकाईयों समेत एक्सपोर्ट यूनिट्स बिजली कटौती से और परेशान होती हैं। इनकेअपने कमिटमेंट्स होते हैं। देरी की वजह से आर्डर कैंसिल की परेशानी भी झेलनी पड़ती है।
राज्य में अकेले एक्सपोर्ट यूनिट्स की बात करें तो उनकी संख्या 100 से अधिक है। ज्यादातर इंजीनियरिंग इक्विपमेंट्स, रबर, प्लास्टिक, आयल फील्ड इक्विपमेंट जैसी यूनिट्स शामिल हैं।
ओवर हेड खर्चों में बढ़ोत्तरी
ओवरहेड खर्चे बढ़ रहे हैं। लेबर की कास्ट अपनी जगह है। उद्योग चलाने वाले आखिर कितना बर्दाश्त करें। उत्पादन न होने की वजह से लेकर कोई प्लानिंग बेहद जरूरी है।
- अनिल मारवाह, प्रांतीय इंडस्ट्रीज एसोसिएशन