गर्मी में देहरादून की बढ़ती प्यास ने पानी बांटने के काम को भी कारोबार बना दिया है।
हर महीने छह करोड़ के पानी की खरीद
पेयजल किल्लत से जूझ रही आबादी हर महीने छह करोड़ का पानी खरीदकर पी रही है। हर दिन बीस लाख रुपए का पानी टैंकरों के जरिये बेचा जा रहा है।
जनता की मजबूरी टैंकर संचालकों के लिए फायदे का सौदा बन गई है और सिर्फ दो साल में यह धंधा दोगुना हो चुका है।
दो साल पहले हर माह जहां सात करोड़ लीटर पानी टैंकरों से सप्लाई किया जाता था, वहीं अब यह 15 करोड़ लीटर हो चुका है।
दूसरी ओर, शहर के पेयजल किल्लत वाले क्षेत्र आज भी वही हैं जो दो साल पहले थे। जल संस्थान ने इन क्षेत्रों में अब तक स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश नहीं की है।
बढ़ गया कंपटीशन
टैंकर संचालक दूरी के हिसाब से रेट तय करते हैं। टैंकर की मौजूदगी वाली जगह से नजदीकी क्षेत्रों में तीन सौ से 350 रुपए लिए जाते हैं, जबकि दूरी के लिहाज से यह रेट 500 से एक हजार तक पहुंच जाता है।
हालांकि, चोखा धंधा देख रोज नए संचालक इस काम में उतर रहे हैं। इससे कंपटीशन भी बढ़ गया है। एक टैंकर संचालक ने बताया कि पानी के काम में अच्छी आमदनी हो जाती है।
बताया कि पहले जो टैंकर 700 में दिया जाता था, वह कंपटीशन के कारण कई बार 300 में देना पड़ता है। लेकिन, पेयजल किल्लत वाले क्षेत्र बढ़ने से काम अधिक है, जिससे दिनभर का अच्छा औसत निकल जाता है।
जल संस्थान के सिर्फ चार टैंकर
जल संस्थान के पास अपने सिर्फ चार टैंकर है। इनमें से तीन पित्थूवाला जोन के हैं, जबकि उत्तर और दक्षिण जोन के लिए सिर्फ एक टैंकर है।
ऐसे में विभाग को निजी टैंकरों की मदद लेनी पड़ती है। जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीडी डिमरी का कहना है कि गर्मी में निजी टैंकरों के जरिये पानी की आपूर्ति कराई जाती है।
यहां टैंकरों की ज्यादा मांग
देहराखास, मातावाला बाग, संजय कॉलोनी, वाल्मीकि बस्ती, मोहिनी रोड, डालनवाला, लक्ष्मण चौक, नारायण विहार, गांधी ग्राम, डंगवाल मार्ग, डोभालवाला, सालावाला, नेशविला रोड, हाथीबड़कला, आर्केडिया ग्रांट, नथुआवाला, बालावाला, रायपुर के कुछ क्षेत्र, जोहड़ी गांव आदि।