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Uttarakhand: नहीं रहे निशानेबाज जसपाल राणा, अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम, प्रदेश में शोक की लहर

Fri, 12 Jun 2026 10:26 AM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

मनू भाकर जैसे कई राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देश को देने वाले मशहूर निशानेबाज जसपाल राणा का निधन हो गया। उनके  निधन की खबर से पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई।
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जसपाल राणा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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निशानेबाज जसपाल राणा अब हमारे बीच नहीं रहे। वह अस्पताल में भर्ती थे। यहां उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने उनके निधन की पुष्टि की। सीने में बेचैनी के बाद उन्हें स्टेंट लगाया गया था, जिसके बाद उन्हें फिर अटैक आया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके निधन पर शोक जताया। 

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टिहरी जिले के चिलामू गांव निवासी जसपाल भारत के पिस्टल निशानेबाजों के लिए 'हाई-परफॉर्मेंस कोच' के रूप में कार्यरत थे,। म्यूनिख में आईएसएसएफ (ISSF) विश्व कप से भारत लौटते समय वह असहज महसूस कर रहे थे। महज 18 साल की उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाकर दुनिया को चौंकाने वाले जसपाल राणा ने राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में भारत का परचम हमेशा बुलंद रखा।

2006 दोहा एशियन गेम्स में उनके तीन स्वर्ण पदक और वर्ल्ड रिकॉर्ड को कोई नहीं भूल सकता। हाल ही में म्यूनिख में हुए आईएएसएफ वर्ल्ड कप के दौरान उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके बाद दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उनकी स्टेंट सर्जरी भी हुई थी। वे रिकवर हो रहे थे, लेकिन गुरुवार रात अचानक आए इस दुखद मोड़ ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया।
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खेल के साथ-साथ उन्होंने सियासत में भी कदम रखा था। उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा (BJP) के टिकट पर टिहरी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। लेकिन हार गए थे। 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान वे कांग्रेस के स्टार प्रचारक बने।

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देवभूमि की माटी के लाल, महान निशानेबाज और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुखद और स्तब्ध करने वाला है। यह संपूर्ण खेल जगत और हमारे उत्तराखंड के लिए एक ऐसा शून्य है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पटल पर तिरंगा लहराकर देश का मान बढ़ाया और कोच के रूप में मनु भाकर जैसी अद्भुत खेल प्रतिभाओं को तराशा। उनका मार्गदर्शन इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। बाबा केदारनाथ और भगवान बद्रीविशाल पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों व प्रशंसकों को यह अपार दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। - रेखा आर्या, कैबिनेट मंत्री उत्तराखंड सरकार
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