राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पताल की जर्जर ईमारत की छत का प्लास्टर और फॉल सीलिंग गिरने से नीचे लेटी महिला मरीज और नवजात शिशु को बाल-बाल बचे। आनन-फानन में लेबर रूम से गर्भवती महिलाओं को दूसरे कक्ष में शिफ्ट किया गया। मौके पर पहुंचे चिकित्साधीक्षक ने निर्माणदायी एजेंसी को तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए।
घटना शुक्रवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे की है। अस्पताल के लेबर रूम में रोज की तरह गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी और नवजात शिशुओं की देखरेख का काम चल रहा था। इसी दौरान छत से सीमेंट का एक बड़ा टुकड़ा सीलिंग पर गिरा।
महिला के ठीक बगल बेड पर गिरी
सीमेंट के वजन से सीलिंग टूट गई और महिला के बगल वाले बेड पर जा गिरी। सीमेंट और सीलिंग गिरते ही मरीजों के साथ ही डॉक्टर और सहायक स्टाफ भी सहम उठे। तुरंत भर्ती महिलाओं और नवजात शिशुओं को दूसरे कमरे में शिफ्ट किया गया।
मामले की जानकारी मिलते ही अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. केके टम्टा मौके पर पहुंचे।
उन्होंने निर्माणदायी एजेंसी यूपीआरएनएल के प्रतिनिधियों को बुलाकर तत्काल छत और सीलिंग की मरम्मत के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने ड्यूटी दे रही डॉक्टर और सहायक स्टाफ से जानकारी ली। उन्होंने बताया कि बिल्डिंग का यह हिस्सा काफी पुराना है। कुछ समय पहले ही इसमें सीलिंग की गई है। हालांकि छत से प्लास्टर झड़ने से रोकने की फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है। इसके लिए एजेंसी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
परेशान रहे तिमारदार
सीमेंट झड़ने और सीलिंग टूटने के बाद लेबर रूम में हड़कंप मच गया। जैसे ही इसकी जानकारी बाहर खड़े तीमारदारों को मिली तो वह मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो उठे। स्टाफ ने उन्हें बताया कि सभी मरीज ठीक हैं और उन्हें दूसरे कमरे में शिफ्ट कर दिया गया है। खुद चिकित्साधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने जब यह जानकारी दी, तब जाकर उनकी जान में जान आई।