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फिर देखेगी झील में डूबी पुरानी टिहरी व घंटाघर

Fri, 06 Dec 2013 01:41 PM IST
विनोद चमोली/ अमर उजाला, चंबा (टिहरी)
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टिहरी बांध की झील में समा चुकी पुरानी टिहरी, राजदरबार, घंटाघर, मंदिर सहित तमाम ऐतिहासिक विरासतों को पर्यटक दोबारा देख सकेंगे।
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इसके लिए पर्यटकों को स्कूबा डाइविंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्कूबा डाइविंग के जरिए लोगों को पानी के अंदर भेजा जाएगा। साथ ही झील में स्पीड जेट बोट, पानी में उतरने वाला जहाज भी लैंड करेगा।

पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा
जल क्रीड़ा के इच्छुक लोग नौकायन, स्वीमिंग, कयाकिंग आदि जल क्रीड़ाओं का आनंद ले सकेंगे।42 वर्ग किलोमीटर में फैली टिहरी बांध की झील सुनसान पड़ी है। अब यहां जल क्रीड़ाओं का आयोजन कर इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा।
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जल क्रीड़ा के खिलाड़ी अभी तक पानी के अंदर जाकर मछलियों और जलचर प्राणियों का लुत्फ लेते थे, लेकिन अब पहली बार झील में समा चुके टिहरी शहर, राज दरबार, घंटाघर, मंदिर आदि ऐतिहासिक स्थानों का लोग दीदार दोबारा कर सकेंगे।

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इसके लिए स्कूबा डाइविंग के जरिए लोगों को पानी के अंदर भेजा जाएगा। टिहरी झील पर्यटक स्थल के रूप में जल्द विकसित होगी। इसके लिए पर्यटकों से निर्धारित टिकट भी लिया जाएगा। जल क्रीड़ा के इच्छुक लोग नौकायन, स्वीमिंग और कयाकिंग आदि जल क्रीड़ाओं का आनंद ले सकेंगे।

कोटी कॉलोनी में देंगे प्रशिक्षण
स्कूबा डाइविंग का आनंद उठाने के लिए पर्यटकों को पानी के अंदर जाने का प्रशिक्षण किया जाएगा। उत्तराखंड पर्यटन परिषद इसका प्रशिक्षण देगी, जो कोटी कालोनी में ही दिया जाएगा।

क्या है स्कूबा डाइविंग
यह जल क्रीड़ा का सबसे महंगा खेल है। इस क्रीड़ा के लिए सर्वप्रथम स्वीमिंग में महारथ हासिल होनी चाहिए। इसके बाद व्यक्ति की स्वास्थ्य रिपोर्ट के बाद ही इस खेल का प्रशिक्षण दिया जाता है।

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अभी इस खेल का अंडमान निकोबार और गोवा में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षित व्यक्ति ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर पानी के अंदर जाकर जल रोमांच का मजा ले पाता है।
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सरकार कई सालों से झील में नई-नई जल क्रीड़ाओं के सुनहरे सपने दिखाती रहती है, मगर आज तक वाटर स्पोर्ट्स लाइसेंस के लिए कोई अधिकृत अफसर नियुक्त नहीं किया गया है।
- पूरन सिंह राणा वाटर स्पोर्ट्स एक्सपर्ट और बांध प्रभावित
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