फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंत्री बने प्रदेश अध्यक्ष तो हसरत हो पूरी

Fri, 06 Dec 2013 01:24 PM IST
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड में कांग्रेस के भीतर उथल-पुथुल जारी है। भले ही प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य को पद पर बने रहने के निर्देश दिए गए हों लेकिन नए अध्यक्ष के लिए लॉबिंग जारी है।
विज्ञापन


राजनीतिक मकसद
कोई सीधे तीर चलाकर अपना राजनीतिक मकसद हल करना चाहता तो वहीं कुछ तिरछे तीर छोड़ रहे हैं।

कांग्रेस विधायकों का एक गुट अपने-अपने ढंग से किसी एक मंत्री को ही अध्यक्ष बनवाना चाहता है। ताकि मंत्री पद खाली हो और प्रतीक्षारत किसी विधायक से उसे भरा जाए।

पढ़ें, बेटे के लिए तांत्रिक के चंगुल में फंसी मां

बहुगुणा सरकार में शामिल दो मंत्रियों प्रीतम सिंह और सुरेन्द्र सिंह नेगी ऊपरी तौर पर भले ही आलाकमान के फैसले को मानने की बात कहें, लेकिन अंदर खाने दोनों ने ही मंत्री पद पर बने रहने की अपनी मंशा प्रदेश प्रभारी अंकिबा सोनी को बता दी है।
विज्ञापन


बावजूद इन दोनों की ताजपोशी के लिए कुछ विधायक लगे हैं। जो मेरा नम्बर कब आएगा की रट लंबे समय से लगाए हैं। इनमें से एक दूसरी बार विधायक चुनकर आए हैं और मुख्यमंत्री के भी करीब बताए जाते हैं।

हरीश रावत का हाथ है
ऐसे ही एक और विधायक हैं तीन बार पार्टी का परचम लहरा चुके हैं लेकिन क्षेत्रीय संतुलन बैठाने में और भारी भरकम नेता के आगे पिछड़ गए हैं।

पढ़ें, यौन शोषण प्रकरणः अपर सचिव जोशी सस्पेंड

सीमांत जनपद के भी एक विधायक जिन पर हरीश रावत का हाथ है उनकी भी हसरत किसी मंत्री के अध्यक्ष बनते पूरी हो सकती है।

एक पूर्व मंत्री भी चाहते हैं कि किसी मंत्री की लाल बत्ती उतरे तो उन्हें इसका फायदा मिल सकता है। इन वरिष्ठ विधायकों ने अपने-अपने ढंग से इस बात की पैरवी शुरू कर दी है कि किसी मंत्री को ही अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी जाए।

पास वो आने जरा-जरा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य और केंद्रीय मंत्री हरीश रावत के बीच दूरियां नजदिकियां बन गई लेकिन इसमें इत्तेफाक नहीं है। राजनीति में कहा जाता है दुश्मन का दुश्मन दोस्त। ऐसा ही कुछ चल रहा है इन दिनों उत्तराखडं कांग्रेस में भी।

पढ़ें, देहरादून में हाईटेक होगा नरेंद्र मोदी का शंखनाद

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से रिश्ते बिगड़ने पर यशपाल आर्य को जरूरत थी एक कैंप की तो उन्होंने हरीश रावत से नजदीकी बढ़ा दी। वहीं हरीश रावत को भी इस समय आर्य की जरूरत थी।
विज्ञापन


आर्य और रावत केहाथ मिला लेने और भविष्य में उनकी जुगलबंदी से मुख्यमंत्री खेमे में बैचेनी है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें