आखिरकार सच की जीत हुई
आखिरकार सच की जीत हुई और 1 दिसंबर 2025 को बांबे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ से उनके हक में फैसला आया। क्षितिजा ने बताया कि कोर्ट में ये साबित भी नहीं हुआ कि कोई डाटा लैपटॉप से ट्रांसफर हुआ था, क्योंकि ऐसा कुछ था ही नहीं, हालांकि ट्रेनिंग के समय के कुछ यूजलेस मैटेरियल लैपटॉप में थे, जिन्हें आधार बनाया गया था। निशांत की मां ऋतु अग्रवाल ने बताया कि बेटे को सजा मिलने के बाद सांस तो ले रही थीं मगर जिंदा नहीं थीं, सिर्फ एक भरोसे पर जिंदा थीं। क्षितिजा अग्रवाल ने बताया कि पति ने जेल में बेटे को लेकर आने मना कर दिया था, उन्हें विश्वास था कि वे एक न एक दिन बाहर आएंगे।
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हर आंख में थे सवाल, कचोट रहे थे आरोप
एटीएस टीम उस समय रुड़की भी पहुंची थी और यहां से भी एक लैपटॉप कब्जे में लिया था, उस दौरान आसपास के लोगों की निगाहें पत्नी और मां को कचोट रही थीं। ऋतु अग्रवाल ने बताया कि आस-पड़ोस के लोगों के व्यवहार बदल गए थे लेकिन रिश्तेदारों ने साथ दिया और हम पर विश्वास रखा।