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Iमूट कोर्ट के समापन पर बुलडोजर न्याय की वैधानिकता पर हुई जोरदार बहस
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Iभारत के संविधान पर आधारित 9वीं लॉ कॉलेज देहरादून मूट कोर्ट प्रतियोगिता का रविवार को समापन हो गया। प्रतियोगिता का अंतिम मुकाबला स्कूल ऑफ लॉ नारसी मोंजी, चंडीगढ़ कैंपस व विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्ट्डीज इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली के बीच हुआ। इसमें स्कूल ऑफ लॉ नारसी मोंजी ने जीत हासिल की।
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Iइलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति महबूब अली ने मुख्य अतिथि के साथ पीठासीन की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, मूट कोर्ट एक कला है, जिसमें दक्षता छात्रों के लिए वकालत के मार्ग प्रशस्त करती है। कहा, असफलता से हमेशा सफलता की शिक्षा मिलती है और उसे आत्मसात करने की आवश्यकता है। पांच जजों की संविधानिक पीठ के सामने बुलडोजर न्याय की वैधता, दलबदल कानून के प्रावधान, विधान सभा स्पीकर की शक्तियां व अवैधानिक व आतंकवादी कार्यकलापों की विवेचना विचारणीय मुद्दे रहे।
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Iकॉलेज के डीन प्रो. राजेश बहुगुणा ने बताया, इस प्रतियोगिता के लिए 23 न्यायालयों की स्थापना की गई। अंतिम मुकाबले में कांटे की टक्कर देखने को मिली। सरकार की ओर से पैरवी कर रहे प्रतिभागियों ने अवैधानिक एवं आतंकवादी क्रियाकलापों का हवाला देते हुए बुलडोजर न्याय सहित सरकार के हर कार्य को वैधानिक करार दिया। याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे प्रतिभागियों ने बुलडोजर कार्रवाई को विश्व का सबसे क्रूर निर्णय बताया।
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Iइस मौके पर प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करने पर भाविका को सर्वश्रेष्ठ महिला अधिवक्ता, धर्मपाल कुमार को सर्वश्रेष्ठ पुरुष अधिवक्ता, सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, पुणे की टीम को सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल, श्रेया मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ रिसर्चर चुना गया। कार्यक्रम में विवि के कार्यकारी निदेशक डाॅ. अभिषेक जोशी, अंकुर यादव, डाॅ. विक्रम श्रीवास्तव, डाॅ. अमन रब, प्रो. पूनम रावत आदि मौजूद रहे।I