विनोद और राजेश दोनों भाई एक ही स्कूल में पढ़ते हैं। दोनों घर से जब स्कूल के लिए निकलते हैं, तो उनकी दिशाएं अलग-अलग हो जाती हैं। एक भाई दो किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़ता है, तो दूसरा एक किमी दूर एएनएम सेंटर की ओर जाता है। इसकी वजह स्कूल की कक्षाएं दो स्थानों पर चलना है।
केस-2
एलटी शिक्षक अजय शर्मा सिर्फ छह से आठ तक की कक्षाएं पढ़ा पा रहे हैं। वह अपने मूल स्कूल भी नहीं जा पाते, जिससे चाहते हुए भी कक्षा नौ और दस के छात्रों को नहीं पढ़ा पा रहे हैं।
पहली दफा सुनने पर तो ये किसी धर्मार्थ संस्था या किसी के निजी प्रयासों से चल रहे विद्यालय की एक झलक दिखती है। लेकिन ये दृश्य सरकार के द्वारा चलाए जाने वाले राजकीय इंटर कॉलेज का है।
राजकीय इंटर कॉलेज परकंडी के पास अन्य सुविधाओं की बात तो भूल जाइए, स्कूल का अपना एक भवन तक नहीं है कि जहां सभी छात्र एक जगह इकठ्ठा होकर पढ़ाई कर सके।
दो जगह चल रही कक्षाएं
जीआईसी परकंडी की कक्षाएं अलग-अलग स्थानों में चल रही है। जूनियर स्तर की तीन कक्षाएं दो किमी दूर एएनएम सेंटर में चल रही है तो शेष कक्षाओं की पढ़ाई स्कूल के मूल भवन में ही हो रही है।
ऐसे में छात्रों को तो परेशानी होती ही है, साथ ही विद्यालय के प्रशासनिक प्रबंधन में भी दिक्कतें आ रही है। एक ही विद्यालय की कक्षाएं अलग-अलग स्थानों पर चलने की वजह स्कूल भवन की जर्जर स्थिति में होना है।
भूस्खलन से हुई थी क्षति
वर्ष 1956-57 में बना जीआईसी परकंडी का भवन अब जीर्णशीर्ण हो गया है। बीच-बीच में भूकंप आने से भी खतरा बना रहता है। पिछले वर्ष सितंबर में भूस्खलन से भी कुछ कमरे क्षतिग्रस्त हो गए। ऐसे में यहां कक्षाएं चलाना खतरनाक है। इसी वजह से कक्षाओं की व्यवस्था में परिवर्तन करना पड़ा।
कक्षा नौ से 12 तक के 173 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई इन्हीं जीर्णशीर्ण कमरों में होती है। जबकि कक्षा छह से आठ तक के 74 छात्र-छात्राएं स्कूल से दो किलोमीटर दूर एएनएम सेंटर में पढ़ते हैं।
पठन-पाठन में व्यवधान न हो इसके लिए 12 शिक्षक सीनियर और चार शिक्षक जूनियर कक्षाओं को पढ़ाते हैं। डेढ़ वर्ष से स्कूल में यही व्यवस्था चल रही है।
ग्रामीणों ने की मदद की पेशकश
समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने गांव के बीच में करीब 13 नाली नापभूमि दान देने की बात कही थी, लेकिन इस पर भी बात आगे नहीं बढ़ पाई।
स्थानीय निवासी जितेंद्र बिष्ट बताते हैं कि एक एनजीओ ने विद्यालय भवन के नवनिर्माण पर सहमति जताई थी। शिक्षा विभाग भूमि के अधिग्रहण की कार्रवाई करेगा, तभी बच्चों की मुश्किल दूर होगी।
क्या कहते हैं अधिकारी
मूल विद्यालय में कमरों की स्थिति ठीक नहीं है। बारिश में खतरा बढ़ जाता है। स्कूल के लिए जितनी जरूरत है, उतनी भूमि दान नहीं दी गई है। सिर्फ दो नाली भूमि का दाननामा हुआ है।
-सतीश चंद्र मलासी, प्रभारी प्रधानाचार्य