करोड़ों का घोटाला, सालों की जांच प्रक्रिया और फिर मामूली जुर्माने के साथ तीन-चार साल की सजा। ज्यादातर घोटालों का हश्र यही है।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के घोटालेबाजों के साथ भी यही हुआ। ज्यादातर मामलों में रिकवरी का कोई विशेष प्रावधान न होने से घोटालेबाज मामूली सजा में बच निकलते हैं।
रिकवरी के नाम पर बस उनका कंट्रीब्यूट्री प्राविडेंट फंड (सीपीएफ) और ग्रेच्युटी सील कर दी जाती है। कुल मिलाकर स्थिति घोटाले करो, किसी से न डरो वाली है।
लोन प्रभारी, मैनेजर की मिलीभगत बगैर मुश्किल
आम आदमी को लोन के लिए वेरिफिकेशन के नाम पर एड़ियां घिसवा देने वाले बैंकों में गड़बड़ियों का ग्राफ जांचने चलेंगे तो चौंक जाएंगे।
अपने रीजन में ही विभिन्न बैंकों में छोटी-बड़ी गड़बड़ियों की ढाई हजार से अधिक विभागीय जांचें चल रही हैं। कई पूरी भी हो चुकी हैं। सीबीआई तक तो एक करोड़ से अधिक केघोटाले ही पहुंचते हैं।
जानकार बताते हैं कि लोन प्रभारी, मैनेजर कीमिलीभगत के बगैर घोटाला बेहद मुश्किल है। सर्वेयर की रिपोर्ट पर भी सवाल उठते रहे हैं। कई घोटाले उच्चाधिकारियों के इशारे पर किसी न किसी लालच में अंजाम दिए जाते हैं।
फर्जी कागजात से लोन के मामले सर्वाधिक
बैंकों में हो रहे घपलों की बात करें तो फर्जी कागजात से लोन हड़पने के मामले सर्वाधिक हैं। एसबीआई के एक अधिकारी के मुताबिक विभागीय जांचों में इसी तरह के मामले सबसे ज्यादा हैं।
वह भी ऐसे जिनमें अधिकारियों, कर्मचारियों ने फर्जी नाम से लोन अप्रूव कराए और फिर उन्हें ‘बैड लोन’ में दिखा दिया।
एनपीए यानी नान परफार्मिंग एसेट्स की आड़ में खेल काफी समय से हो रहा है।
ताजा मामला सिंडीकेट बैंक से जुड़ा है। इसका खुलासा अगस्त के पहले सप्ताह में हुआ, जब सीबीआई ने इस बैंक के चेयरमैन और एमडी सुधीर जैन को उनके रिश्तेदार समेत चार अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया।
उन पर नियमों को ताक पर रखते हुए दो निजी कंपनियों प्रकाश इंडस्ट्रीज और भूषण स्टील की क्रेडिट लिमिट बढ़ाने के लिए 50 लाख की रिश्वत लेने का आरोप था।
हिरासत में लिए गए आरोपी
सीबीआई ने पहली बार आंतरिक जांच के आधार पर ऐसा कदम उठाया था। प्रकाश इंडस्ट्रीज के चेयरमैन वीपी अग्रवाल समेत भूषण स्टील के नीरज सिंघल को भी हिरासत में ले लिया गया।
अकेले उत्तराखंड की बात करें और 30 सितंबर, 13 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो विभिन्न बैंकों की तरफ से 36 खातों में फंसे 514 करोड़ रुपए के लिए सूट फाइल किया गया है।
जिन बैंकों की तरफ से यह कदम उठाया गया है, उनमें सेंट्रल बैंक आफ इंडिया, सिडबी, पंजाब नेशनल बैंक, ओरियंटल बैंक आफ कामर्स, पंजाब नेशनल बैंक , केनरा बैंक, इलाहाबाद बैंक, आईडीबीआई, द साउथ इंडियन बैंक, स्टेट बैंक आफ पटियाला शामिल हैं।