उत्तराखंड में गरीबों के हिस्से में अधिकारियों और स्वयं सहायता समूहों ने मिलकर डाका डाला है। टेक होम राशन के नाम पर करोड़ों का घपला हुआ। जिसकी शिकायत सीएम, गर्वनर से लेकर केंद्रीय बाल विकास एवं महिला सशक्तिकरण मंत्री मेनका गांधी तक से की गई। सीडीओ की ओर से डीडीओ को जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
केंद्र की ओर से गर्भवती और कुपोषित बच्चों के लिए टेक होम राशन की योजना तो शुरू हुई लेकिन उत्तराखंड में इसके लिए अलग ही मानक तय कर दिए गए। केंद्र से मिली गाइड लाइन के अनुसार इस योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों के अकाउंट में सामग्री खरीद के लिए पैसा आना होता है। जिसे चेक से निकालकर केंद्र की कार्यकत्री सामग्री की खरीद कर खुद ही इसका वितरण करती हैं।
वहीं उत्तराखंड में स्वयं सहायता समूहों को मीडिएटर बनाकर मोटा घपला किया जा रहा है। वहीं राज्य सरकार की ओर से एक साल पहले बुजुर्गों के लिए भी यह योजना शुरू की गई। स्वयं सहायता समूहों को जबरन काम देने को लेकर करीब डेढ़ साल पहले विकासनगर की एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री अंजुल गुप्ता हाईकोर्ट गई। केंद्र की गाइड लाइन का पालन करने के आदेश भी पारित हुए, फिर भी उनका पालन नहीं हुआ।
ऐसे हो रहा घपला
केंद्र की टेक होम राशन योजना के तहत गर्भवती, बुजुर्ग महिलाओं सहित कुपोषित बच्चों के लिए हर माह 150 से लेकर 225 रुपये तक की सामग्री की खरीद की जाती है। यह पैसा आ तो आंगनबाड़ी केंद्रों के अकाउंट में रहा है लेकिन इन्हें यह पैसा स्वयं सहायता समूहों को देना होता है। समूह खरीदारी कर केंद्रों को सामग्री बांटने के लिए देते हैं। नैनीताल में लोगों के विरोध के बाद यह व्यवस्था खत्म कर केंद्र की गाइड लाइन का ही पालन किया जा रहा है। यानी व्यवस्था पूरी तरह से आंगनबाड़ी केंद्रों के हाथों में है।
अधिकारियों और स्वयं सहायता समूह मिलकर खूब घपला कर रहे हैं। दोगुने रेट पर सामान की खरीदारी दिखाई जा रही है। मामले की शिकायत सीएम, गर्वनर, केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी तक से की गई है। गर्वनर के सचिव की ओर से जांच के आदेश भी दिए गए हैं, इसके बावजूद इस ओर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। गोविंद मोहन, पूर्व पार्षद एवं सांसद प्रतिनिधि
शिकायतकर्ताओं की शिकायत मिल चुकी है। रेट लिस्ट में फर्क तो है। मामले की जांच की जा रही है। हर पहलू को देखा जा रहा है कि आखिर कैसे रेट में इतना फर्क दर्शाया गया है। शिकायत हमसे पुराने सीडीओ के पास थी तो अब मामला संज्ञान में आते ही डीडीओ को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है।
- वंशीधर तिवारी, सीडीओ
तब दून में सीडीओ रहे आलोक कुमार पांडे के अनुसार शिकायत कर्ता ने अधिकारियों तक पर आरोप इसलिए लगाए हैं क्योंकि वह खुद किराने की दुकान चलाते हैं। समूहों के आने से सामग्री की गुणवत्ता सुधरी ही है। सीधे समूहों को यह काम नहीं दिया गया बल्कि इससे पहले माता समिति की राय ली गई थी।
जब केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार टेक होम राशन योजना का पूरा काम आंगनबाड़ी केंद्रों को ही देखना था तो सीएम की ओर से हर जिले में कमेटी का गठन क्यों किया गया। कमेटी में सीडीओ, डीएम, डीपीओ को रखा गया। जो कि हर महीने की 30 तारीख को स्वयं सहायता समूहों के साथ बैठक करते हैं। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ही करोड़ो के घपले को बल मिला है। हाईकोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है।
- सुशीला खत्री, प्रदेश महामंत्री, उत्तरांचल आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ
शिकायत कर्ता की रेट लिस्ट
सामग्री थोक बाजार रेट सप्लाई रेट
मूंग की दाल 80 रुपये प्रति किलो 140 रुपये प्रति किलो
राजमा 60 रुपये प्रति किलो 100 रुपये प्रति किलो
दलिया 23 रुपये प्रति किलो 34 रुपये प्रति किलो
चना 90 रुपये प्रति किलो 120 रुपये प्रति किलो
पोहा 35 रुपये प्रति किलो 70 रुपये प्रति किलो
सोयाबीन बड़ी 40 रुपये प्रति किलो 85 रुपये प्रति किलो