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केंद्र पोषित योजना में घपला, तीन अधिकारियों पर गिरी गाज

Mon, 04 Jul 2016 01:40 PM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : demo pic
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देहरादून में केंद्र पोषित समेकित जलागम प्रबंध योजना में घपला सामने आया है। 49 लाख रुपये की लागत से होने वाले विभिन्न कार्यों में वित्तीय अनियमितता पर मुख्य कृषि अधिकारी देहरादून सहित तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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केंद्र पोषित समेकित जलागम प्रबंध योजना के तहत चकराता ब्लॉक में वर्षा जल संचय, चेक डैम, जल संरक्षण, तालाब निर्माण और पौध रोपण कार्य होने थे। लेकिन योजना के तहत चकराता ब्लॉक में जलाशयों का निर्माण ऐसे स्थानों पर कर दिया गया, जहां पानी के स्रोत ही नहीं थे।

निर्माण कार्यों के लिए भुगतान का वर्णन कैश बुक में होना चाहिए था, लेकिन कैश बुक ही नहीं बनाई गई। कुछ काम हुए बगैर ही जलागम समितियों के खाते से लाखों रुपये निकाल लिए गए। जबकि, यह धनराशि मुख्य कृषि अधिकारी की अनुमति के बगैर नहीं निकाली जा सकती। जिलाधिकारी देहरादून की ओर से दिसंबर 2015 में गठित जांच समिति ने भी विभागीय कार्यों को नियमानुसार और सही तरीके से नहीं कराने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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मुख्य कार्यकारी अधिकारी जलागम प्रबंधन आनंद वर्द्धन ने कृषि निदेशक गौरी शंकर को लिखे पत्र में कहा कि डीपीआर में कच्चे जलाशय बनाने का कोई प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद अधिकारियों ने अधिकारों का दुरुपयोग कर उनका मापन किया है। जिलाधिकारी की गठित जांच कमेटी और जलागम प्रबंध निदेशालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से मामले में कार्रवाई के लिए कृषि निदेशक को लिखे जाने के बाद निदेशक ने शासन को भेजी रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।

कृषि निदेशक गौरी शंकर ने शासन को लिखे पत्र में कहा कि मुख्य कृषि अधिकारी देहरादून ज्योति एस कुमार ने अपने दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं किया। वहीं, मामले में कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी चकराता व तत्कालीन सहायक कृषि अधिकारी ओमवीर सिंह के खिलाफ सरकारी सेवा नियमावली के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। नौ जून 2016 मामले में संबंधित अधिकारियों को विभाग की ओर से आरोप पत्र भी दिए गए हैं।

भाजपा नेता का रिश्तेदार है एक आरोपी
लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता के इस मामले में एक अधिकारी भाजपा के बड़े नेता का रिश्तेदार बताया गया है। यही वजह है कि मामले में विभाग की ओर से कार्रवाई के बजाय लीपापोती के प्रयास किए जा रहे हैं।
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Published by : Nirmala Suyal
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